‘बरसाने की ब्रज गोपिन ने घेर लिये हैं कुंवर कन्हैया, घेर लई है गली रंगीली, छाय रही है छटा छबीली, श्याम गुलाल उड़ाये हैं’....।
बरसाना की तंग गलियों में गुरुवार को अद्भुत प्रेम और उल्लास था। प्रेम भी अलौकिक, जिसमें हुरियारिनों के हाथों प्रेम पगी लाठियां हुरियारों पर बरस रही थीं और श्रीकृष्ण के सखा इन लाठियों में प्रेम की अनुभूति से आनंदित थे।
यही बरसाना है जो लठामार होली को जी रहा है। अनुपम लोक लीला के बीच श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर की पुष्प वर्षा समूची लीला के उत्सव को भव्यता प्रदान करती रही।
श्रीराधारानी के गांव बरसाने में पांच हजार वर्ष पुरानी राधा-कृष्ण के अद्भुत प्रेम की लीला साकार होने को आतुर थी। घर-घर में नई नवेली दुल्हनें सोलह शृंगार कर हाथ में लाठियां लिए थीं, इधर भगवान श्रीकृष्ण के गांव नंदगांव से आए हुरियारे श्री लाड़िलीजी का आशीर्वाद लेकर इन हुरियारिनों की प्रेम पगी लठामार होली को जीने के लिए उत्साहित थे।
गुरुवार को बरसाने में सुबह से ही फागुनी बयार तेज थी, हर कोई अपनी मस्ती में था। गलियों में रंग की बरसात और इस रंग में खुद को सराबोर करने की ललक हर खास-ओ-आम के मन में थी। घरों में सोलह शृंगार कर सज रही हुरियारिनें नंदगांव से आ रहे हुरियारों को मजा चखाने को बेताब थीं। इधर, श्रीजी मंदिर में लाड़िलीजी की एक झलक के लिए श्रद्धालु कतारबद्ध थे।
शाम चार बजते-बजते बरसाने की गलियों में हुरियारिनें हाथों में लाठियां लेकर आ गईं। इधर, नंदगांव के हुरियारे भी श्रीजी का आशीर्वाद लेकर प्रेम रस बरसाती लाठियों से बचने के लिए बार-बार अपनी ढाल का इस्तेमाल करते रहे। हर गली, चौक-चौबारे में हुरियारिनों की लाठियां और हुरियारों की छींटाकशी के आकर्षण में खिंचे चले आए लाखों श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। इस लीला के प्रति हुरियारिनें सूरज से गुहार लगा रहीं थीं कि ‘सूरज छिप मत जइयो आज, श्याम संग होरी खेलूंगी।’