श्रीजी की नगरी में लठामार होली के उल्लास के बाद अगले दिन शनिवार को कन्हैया के गांव (नंदगांव) में इस अनोखी लीला ने श्रद्धालुओं को आनंदित किया। यहां हुरियारे थे राधा के गांव (बरसाना) के सखी भाव से आए गोप और हुरियारिन नंदगांव की गोपियां।
शनिवार को सुबह से ही चारों ओर रंग और गुलाल से मले हुए चेहरे थे और हर तरफ राधे-राधे की गूंज सुनाई दे रही थी। गलियों के नुक्कड़ों पर नन्हे हुरियारे पिचकारियां लिए लोगों की राह तक रहे थे, नजदीक आते ही रंग भरी पिचकारी लेकर उन पर टूट पड़ते। पूरी तरह से उन्हें रंग में सराबोर नहीं करते तब तक नहीं छोड़ते। रंग गुलाल का यह दौर दिन भर चला।
दोपहर में हुरियारों ने गली गली घूमकर हुरियारिनों से जमकर हंसी ठिठोली की। ठिठोली से उकसी हुरियारिनों ने बरसाना के हुरियारों पर प्रेम पगी लाठियां बरसाईं। हुरियारिन और हुरियारों के बीच लठामार होली का यह खेल रंग और गुलाल के बीच मौजूद जनसमूह को अलौकिक आनंद की अनुभूति करा रहा था। देखते ही देखते हुरियारिनों के लट्ठों की बरसात इतनी तेज हो गई कि इससे बचने के लिए ढाल लिए हुरियारे घुटनों के बल बैठने को मजबूर हो गए। यह प्रेम पगी लाठियां लगातार बरस रहीं थीं और हुरियारे ढाल से लगातार बचाव कर रहे थे। बीच-बीच में जब लट्ठ लग जाता तो बचने के लिए मनुहार भी करते, लेकिन गोपियां मानने वाली नहीं थीं। होली गायन और उड़ता अबीर गुलाल वातावरण में उमंग घोल रहा था।
नंदबाबा का गांव सूर्य छुपने तक पूरी तरह होली की मस्ती में सराबोर हो गया।
इससे पूर्व नंदभवन में नंदगांव के ग्वालों ने बरसाना के हुरियारों पर पिचकारी, बाल्टियों से टेसू के फूलों के रंग से सराबोर कर दिया। नंदभवन में चहुंओर सतरंगी छटा छा गई। यहां दर्शन के बाद ब्राह्मण वर्ग ने कृष्ण-बलराम के विग्रहों के सामने संयुक्त समाज गायन किया। बरसाने की गोपी फगुवा मांगन आईं, कियौ जुहार नंद जू कौं भीतर भवन बलाईं। फगुवा मिस ब्रज सुंदरी जसुमति ग्रह आईं, तब ब्रजरानी बोल कैं रावर में लिनी आदि पदों की धूम मची रही।
भाभी होलें होलें दीजौ अभई हम लौहरे हैं
पहली बार होली खेलने वाले नन्हे हुरियारे भीड़भाड़ देख झिझक रहे थे। उनके संरक्षक हुरियारे उनका साहस बढ़ा रहे थे। हुरियारिनों ने नन्हे हुरियारों की मनोदशा जान उनके छोटे ढाल पर धीरे-धीरे लाठियों के प्रहार किए। नन्हें कार्तिक गौड ने हुरियारिन से तोतली जवान में कहा कि भाभी होलें होलें दीजौ अभई हम लौहरे हैं। आठ वर्षीय निशांत और पांच वर्षीय चिराग पहले तो लाठियों के डर से दूर भागने लगे, लेकिन जब हुरियारिनों ने धीरे-धीरे उनकी छोटी ढाल पर लाठियां मारीं तो बोल उठे-भाभी नैंक जोर ते दै भइया ने कछू खबायौ नाय का।
सूर्यास्त के बाद थमा लाठियों का शोर
अद्वितीय राधाकृष्ण की अलौकिक होली लीला देखने के लिए भगवान सूर्य भी कुछ क्षण के लिए स्थिर हो जाते हैं। गोपियां भी सूर्य देव से कहती हैं कि सूरज छिप मत जइयो आज श्याम संग होरी खेलुंगी। मान्यता है कि जब तक गोपियां हुरियारे और कान्हा के साथ होली नहीं खेलतीं तब तक सूर्य नहीं छिपता है।
नंदगांव में होली की परंपरा
नंदबाबा मंदिर के सेवायत और गोस्वामी समाज के मुखिया छैलबिहारी गोस्वामी ने बताया कि कृष्णकाल में भगवान श्रीकृष्ण फागुन सुदी नवमी को होली खेलने बरसाना गए और बिना फगुवा (नेग) दिए ही वापस लौट आए। बरसाना की गोपियों ने कन्हैया से होली का फगुवा लेने के लिए नंदगांव जाने की सोची। विजन गोस्वामी के अनुसार इसके लिए राधाजी ने बरसाना की सभी सखियों को एकत्रित किया और बताया कि कन्हैया बिना फगुवा दिए ही लौट गए हैं। हमें नंदगांव चलकर उनसे फगुवा लेना है। बस फिर क्या, अगले दिन ही दशमी को बरसाना की ब्रजगोपियां होली का फगुवा लेने नंदगांव आती हैं। कन्हैया की इसी लीला को जीवंत रखने के लिए आज भी लठामार होली का आयोजन किया जाता है।
यशोदा कुंड पर हुआ बचाव का इंतजाम
नंदगांव। जब बरसाना के हुरियारे नंदगांव में पहुंचे तो उनको मालूम था कि उनके ऊपर अब लाठियों की बरसात होने वाली है। इससे बचने के लिए उन्होंने यशोदा कुंड पर ही पूरी तैयारी कर ली। सभी पाग (लठामार होली से अपने सिर को बचाने के लिए बांधी जाने वाली पगड़ी) बांधकर तैयार हो गए। इससे पहले हुरियारों ने पिस्ता, बादाम, रबड़ी आदि में चकाचक भांग की छाना घोटी की।
बरसाने वाले पाग बांधकर भूरे के मोहल्ले से हंसी ठिठोली करते नंदभवन पहुंचते हैं। राह में मिलने वाली हुरियारिनों से हंसी-ठिठोली करते नंद के जमाई की जय बोलते हुए गुजरते हैं। एक हुरियारे ने करीब 80 वर्षीय हुरियारिन सोनदेई से कहा कि भाभी होरी कौ बुलायौ है। हुरियारिन ने लाठी के हूदे से निमंत्रण स्वीकार किया। गली में एक घर था, जिसमें से एक नई हुरियारिन खिड़की से झांक रही थी। तभी दूसरे ने कहा कि दर्शन दै निकस अटा में ते दर्शन दै। हंसी-ठिठोली करते हुरियारे नंदभवन पहुंचे वहां नंदबाबा के साथ ही उनके पूरे परिवार के दर्शन किए।