जिला पंचायत के चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल को इस बार तगड़ा झटका लगा है। पिछले चुनाव में 21 वार्ड में जीतने वाला रालोद अब सिर्फ 8 वार्ड में ही सिमट कर रह गया है। बसपा सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है, जबकि भाजपा 8 और सपा तीन वार्ड जीत सकी है।
ग्रामीण अंचल की राजनीति के केंद्र जिला पंचायत में इस बार बसपा ने अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। भले ही एक पूर्व मंत्री और एक विधायक की पत्नी चुनाव हार गई हों, फिर भी सबसे बड़े दल के रूप में बसपा उभरकर आई है। इस बार बसपा को 12 वार्ड में कामयाबी मिली है।
इसमें वार्ड एक से सुधा शर्मा, दो से ललित शर्मा, तीन से किरनदेवी, छह से मुकेश भारद्वाज, सात से पूनम वार्ष्णेय, 14 से अंगद बंजारा, 16 से मोहन सिंह गूजर, 24 से अंजना गौतम, 25 से गीता, 28 से अंजली कर्दम, 32 से पवनजीत और 34 से सीमादेवी शामिल है। पिछले चुनाव में बसपा को सिर्फ तीन वार्ड में सफलता मिली थी।
वर्तमान जिला पंचायत बोर्ड में काबिज रालोद इस बार धराशायी हो गई है।
इसमें रालोद से वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अनूप चौधरी और दल के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिकरवार खुद चुनाव हार गए हैं। रालोद को इस बार वार्ड 20 में पूरन, 21 अरुण कुमार, 22 में भूप सिंह, 26 में पीयूष धनगर, 33 से बैकुंठीदेवी, 35 से लालजीत और 36 से चंचल चौधरी, 37 में रामवीर भरंगर के रूप में कामयाबी मिली है।
भाजपा दो दशक बाद जिला पंचायत चुनाव मैदान में उतरी है। 1995 में भाजपा इन चुनावों में उतरी थी। इस लंबे इंतजार के बाद भाजपा ने आठ वार्ड में जीत दर्ज की है। इसमेें वार्ड चार से तेजबहादुर, 11 से ओमप्रकाश, 12 से ममता चौधरी, 17 से खजान सिंह, 18 से रजनी, 29 से नितिन दिवाकर, 30 से सीमा शर्मा, 31 से रतन सिंह को जीत मिली है।
हालांकि पार्टी में विद्रोह का कारण बने वार्ड 10 में नरदेव ने बगैर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज कर ली है। अब भाजपा नरदेव सिंह को अपना बता रही है। इनके साथ ही प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी सपा ने भी जनपद में तीन वार्ड जीतने में सफलता पाई है।
इसमें वार्ड पांच में सुनीता नौहवार, वार्ड 23 से वीरेन्द्र यादव और वार्ड 27 से कमलेश सिंह को जीत मिली है। पार्टी के जिलाध्यक्ष तुलसीराम शर्मा और पूर्व जिलाध्यक्ष ठाकुर किशोर सिंह के पुत्रों को हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि किशोर सिंह अपनी पत्नी को जीत दिलाने में सफल हो गए हैं।