मथुरा। न कानून का उल्लंघन न कोई अपराध। केवल अपने परिजन तथा घरौंदों तक पहुंचने की आस उनके लिए अपराध बन गई। मजदूरी करने वाले स्थान से हजारों रुपये देकर वाहन किए। पुलिस ने उन्हें रास्ते में उतार लिया और फिर न रोटी दी न पानी। यहां तक कि घर तक पहुंचने के लिए वाहन तक नहीं उपलब्ध कराए। इसका मजदूरों ने जब विरोध किया तो पुलिस की लाठियां खानी पड़ीं।
उधर, खाना-पानी का इंतजाम कराने में नाकाम अधिकारी बेबस होकर सिर्फ निर्देश देते रहे। कोसीकलां मंडी और रैपुरा जाट का हरदयाल विद्यालय जैसे मजदूरों के लिए जेल बन गए थे। उन्हें रोकने के लिए चारों ओर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई।
इसके लिए कोसीकलां में कोसी थाने के अलावा शेरगढ़, छाता, महावन, मांट, गोवर्धन, बरसाना, मगोर्रा सीओ महावन के अलावा 60 रिजर्व पुलिस बल तैनात किया गया था, जबकि फरह में रैपुरा जाट पर फरह के अलावा रिफाइनरी, जमुनापार, सदर बाजार आदि थानों की पुलिस लगी थी। इसके अलावा यहां पर करीब 60 रिजर्व पुलिस और पीएसी भी तैनात की गई थी।
मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन सभी प्रयास कर रहा है। बसों का इंतजाम किया जा रहा है। खाने-पानी का पर्याप्त इंतजाम है। जीएलए विवि में भी मजदूरों को ठहराने और भोजन की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें मजदूरों की जांच कर रही हैं। शीघ्र ही सभी मजदूरों को उनके घरों के लिए रवाना कर दिया जाएगा। मजदूरों से अपील है कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करें।
- सर्वज्ञराम मिश्र, जिलाधिकारी
मजदूरों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाने के लिए पुलिस द्वारा सभी प्रयास किए जा रहे हैं। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने सख्ती जरूर की है, लेकिन मजदूरों पर लाठियां नहीं बरसाई हैं। लॉकडाउन के नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस सख्ती कर रही है। चोरी-छिपे अन्य प्रदेशों से यूपी में आने वाले मजदूरों पर निगाह रखी जा रही है। पकड़ में आने पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है।
- डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी