केंद्र सरकार पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए श्रीकृष्णा सर्किट बनाकर विकास कार्यों का खाका खींच रही है। इस योजना में भगवान श्रीकृष्ण की लीला, क्रीड़ा स्थलियों का पौराणिक स्वरूप बनाए रखते हुए विकास किया जाना है। दिलचस्प बात ये है कि 98 करोड़ के प्रस्ताव तैयार हैं, लेकिन इनमें कान्हा के गोकुल और राधारानी की जन्मस्थली रावल को ही स्थान नहीं मिला है।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय भगवान श्रीकृष्ण और बुद्ध की लीला, जन्मस्थली और कर्म स्थली को सर्किट बनाकर विकास की योजना तैयार कर रहा है। इसके तहत श्रीकृष्णा सर्किट में नंदगांव, बरसाना, मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन को शामिल किया गया है।
पर्यटन विभाग ने दिया योजना का प्रजेंटेशन
जिला पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव ने बताया श्रीकृष्ण सर्किट में कुल 98 करोड़ की लागत से कार्य कराए जाने हैं। इसमें गोवर्धन के 21 किलोमीटर परिक्रमा मार्ग, यात्रियों के लिए टॉयलेट, शेल्टर, सोलर लाइट आदि के कार्य कराए जाने हैं। उन्होंने बताया कि योजना के प्रथम चरण में गोकुल और रावल को शामिल नहीं किया गया है। इस योजना का प्रजेंटेशन दिल्ली में दिया जा चुका है।
ब्रज में गोकुल, रावल का विशेष महत्व है। गोकुल भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का साक्षी है। भगवान श्रीकृष्ण और पुष्टि मार्गीय संप्रदाय से जुड़े देश और विदेश के करोड़ों भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र भी है। गोकुल, रावल के बिना श्रीकृष्णा सर्किट अधूरा ही रहेगा। इसके साथ ही इस प्रकार की योजनाओं में क्षेत्र के आध्यात्मिक गुरुओं से भी मशविरा करना चाहिए। तभी ये विकास संपूर्ण होगा।
- पंकज बाबा, पुष्टिमार्गीय आचार्य, गोकुल