अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रस्ताव पर कासगंज कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) को राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के नाम कर दिया है। स्वीकृति मिलते ही विवि ने इसकी डीपीआर भी आईसीईएआर को भेज दी है।
देश भर में कृषि विज्ञान केंद्रों का संचालन विभिन्न कृषि और वेटरनेरी विवि के माध्यम से किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का संपूर्ण खर्च केंद्र सरकार उठाती है। बीते दिनों अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने नवस्थापित होने वाले कासगंज कृषि विज्ञान केंद्र के संचालन का प्रस्ताव वेटरनेरी यूनिवर्सिटी मथुरा को दिया था। इसे यूनिवर्सिटी ने राज्य सरकार को प्रस्तावित कर दिया। गौरतलब रहे कि इसके लिए जमीन की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी होती है।
राज्य सरकार ने आईसीईएआर के फैसले के अनुरूप कासगंज कृषि विज्ञान केंद्र का संचालन वेटरनेरी यूनिवर्सिटी से कराने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। आदेश मिलते ही विवि ने कासगंज कृषि विज्ञान केंद्र के लिए भवन, संसाधन संबंधी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट आईसीईएआर को भेज दी है, जिससे कासगंज केवीके को जल्द अमल में लाया जा सके।
अलीगढ़, हाथरस, फीरोजाबाद की तैयारी
वेटरनेरी विवि अभी हाथरस और अलीगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र नजर बनाए है। यूनिवर्सिटी जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों का संचालन अपने हाथ में लेने की तैयारी कर रही है। इस बारे में कुलपति दिल्ली और लखनऊ को अवगत करा चुके हैं।
राज्य सरकार ने कासगंज केवीके के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। अब मथुरा के साथ कासगंज कृषि विज्ञान केंद्र का संचालन यूनिवर्सिटी करेगी। यह मथुरा वेटरनेरी यूनिवर्सिटी के लिए बड़ी उपलब्धि है।
- प्रो. केएमएल पाठक
कुलपति, वेटरनेरी यूनिवर्सिटी