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छज्जू लाये खाट के पाये, मार-मार लट्ठ के झूर कर आये.

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कंस टीला स्थित कंस का वध करने के लिए हाथों में लठ्ठ लेकर खडे चतुर्वेदी समाज के लोग। - फोटो : MATHURA
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मथुरा। कान्हा की नगरी गुरुवार की शाम कंस वध लीला की साक्षी बनी। इस दौरान छज्जू लाये खाट के पाये, मार-मार लट्ठ के झूर कर आये, याही कंस की दाढ़ी लाये, याही कंस की मूंछे लाये...के बीच चतुर्वेदी समाज के लोग कंस टीला पहुंचे।
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यहां ठाकुर जी का इशारा पाते ही चतुर्वेदी समाज के युवाओं ने कंस के पुतले पर लाठियां बरसाकर उसका अंत कर दिया। श्री माथुर चतुर्वेद परिषद की ओर से आयोजित कंस वध मेला में देश-विदेश से आए समाज के युवा परंपरागत वेशभूषा में सजकर लाठियां लेकर शामिल हुए।
शाम को समाज के सभी लोग हनुमान गली पर एकत्रित हुए। यहीं से भगवान श्रीकृष्ण एवं बलराम के स्वरूप सुसज्जित रथ पर सवार होकर कंस वध के लिए निकले। इससे पहले कंस का पुतला ढोल-नगाड़ों की धुनों के बीच कंस टीले पर पहुंचा।
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चतुर्वेदी समाज के युवा कंस के अखाड़े से उसका चेहरे को घसीटते हुए रंगेश्वर, होलीगेट, छत्ता बाजार होते हुए कंसखार पर लेकर पहुंचे। कंसखार पर कंस का अंत हुआ। विश्राम घाट पर अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक सहित पदाधिकारियों ने आरती उतारी।
इस दौरान आतिशबाजी भी की गई। अंत में पदाधिकारी व सदस्यों का स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया। इस अवसर पर संरक्षक गिरधारीलाल पाठक, नवीन नागर, गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, दिनेश पाठक, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश तिवारी एडवोकेट, उपाध्यक्ष अरविन्द चतुर्वेदी भूरा, संजीव चतुर्वेदी एड., कमल चतुर्वेदी मोला, प्रदीप पाठक, अमित चतुर्वेदी, आशीष चतुर्वेदी, मनोज पाठक, मुकेश स्वामी, राजीव चतुर्वेदी, युवा समिति अध्यक्ष आशीष चतुर्वेदी, सहसंयोजक अनुज पाठक, बनवारीलाल चतुर्वेदी थे।
आकर्षक झांकियों ने मोहा लोगों को मन
शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण के विजय घोष करते हुए सैनिक चल रहे थे। इसके बाद भगवान गणेश, राधाकृष्ण, शंकर यशोदा चरित्र झांकी, रथ पर सवार कृष्ण बलदेव अकूर का, महारास आदि झांकी आकर्षण का केंद्र रहीं। इन झांकियों को देखने के लिए चतुर्वेदी समाज के साथ शहर के लोगों की भीड़ जुटी रही।
आज यमुना में दीपदान से होगा महोत्सव का समापन
कंस वध मेले के अंतर्गत 8 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के उपलक्ष्य में पुण्य तीर्थ विश्राम घाट पर भव्य दीपदान होगा। वहीं, कंस के वध का प्रायश्चित करने के लिए चतुर्वेदी समाज के लोग मथुरा-वृंदावन, गरुड़ गोविंद की (तीन वन) की परिक्रमा लगाएंगे।
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