सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी को लेकर संत प्रेमानंद महाराज ने एक सशक्त और भावनात्मक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि बेईमानी से कमाया गया धन परिवार में सुख नहीं, बल्कि अशांति और दुख लाता है।
रिश्वत के बारे में पूछा सवाल
घटना तब की है जब एक व्यक्ति ने संत प्रेमानंद से मिलकर बताया कि उसने रिश्वत न लेने की कसम खाई थी, लेकिन जब मौका सामने आया तो वह अपने संकल्प से डगमगा गया और रिश्वत ले ली। इसके बाद से उसके घर में लगातार समस्याएं बनी हुई हैं।
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ये पैसा परिवार को दुख देगा
इस पर संत प्रेमानंद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह अधर्म का धन है, जो लेते समय अच्छा लगता है, लेकिन अंत में यही पैसा परिवार को दुख देगा। वेतन से कम चलेगा, लेकिन सुख से चलेगा। अगर बाइक नहीं खरीद सकते तो साइकिल से चलो, स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।
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सादा जीवन ही देता है सच्चा सुख
बेईमानी के पैसों से कार तो आ जाएगी, लेकिन एक दिन एक्सीडेंट में सब कुछ चला जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सादा जीवन ही सच्चा सुख देता है। दाल-रोटी खाओ, लेकिन अधर्म का धन मत कमाओ। संत प्रेमानंद का यह बयान उस समय आया है जब मथुरा में लगातार रिश्वत लेने के मामले में सामने आ रहे हैं। एंटी करप्शन लगातार कार्रवाई कर रही है।