मथुरा के बरसाना में बूढ़ी लीला महोत्सव के अवसर पर मंगलवार को प्राचीन लीला स्थली विलासगढ़ पर जोगन लीला का मंचन हुआ, जिसने श्रद्धालुओं को भक्ति-रस की गंगा में सराबोर कर दिया।
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श्याम स्वामी चिकसौली वालों की रास मंडली ने रासविलास और युगल नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को माधुर्य से भर दिया। विलासगढ़ स्थित रासमंडल चुबतरे पर जब राधा-कृष्ण स्वरूपों ने मयूर नृत्य और जोगिन लीला का अद्भुत अभिनय किया, तो भक्तगण अलौकिक आनंद में डूब गए।
लीला के अनुसार, श्रीकृष्ण ने राधाजी के निज दर्शन हेतु जोगिन वेश धारण किया और महल में आकर आवाज़ लगाई, “कोई अपनी भाग्यरेखा दिखवाले।” राधाजी की सखियां ललिता और विशाखा उन्हें भीतर ले गईं। जब जोगिन बने श्रीकृष्ण ने राधाजी की भाग्यरेखा देखकर कहा कि उनका विवाह नंदकिशोर से होगा, तभी राधाजी और सखियों ने उनके स्वर और भावों से पहचान लिया कि यह कोई साधारण जोगिन नहीं, बल्कि स्वयं श्यामसुंदर हैं।
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यह रहस्य खुलते ही पूरा वातावरण राधा-कृष्ण के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। भक्तों ने इस दृश्य को केवल अभिनय नहीं, बल्कि राधा-माधव मिलन का प्रत्यक्ष दर्शन मानकर आत्मिक भाव से स्वयं को कृतार्थ अनुभव किया।