फरह। ब्रज तीर्थ विकास परिषद व वन विभाग द्वारा विकसित जोधपुर झाल वेटलैंड पर रिमझिम फुहारों के बीच रंग-बिरंगे जलीय पक्षियों की उपस्थिति आकर्षण का केंद्र बन गई है।
मानसून के दौरान वाटरकॉक अपनी आकर्षक काली देह, लाल माथे तथा लंबे पैरों के कारण आकर्षित कर रहा है। बीआरडीएस के ईकोलॉजिस्ट डॉ. केपी सिंह के अनुसार जलीय पक्षी वाटरकॉक घने सरकंडों, दलदली घास और उथले जल क्षेत्रों में छिपकर रहता है। यह वर्षा ऋतु में सक्रिय दिखाई देता है और कीटों, घोंघों, छोटे जलीय जीवों तथा बीजों पर निर्भर रहता है। इस अवधि में अधिकांश प्रजातियां प्रजनन करती हैं।
उन्होंने कहा कि वाटरकॉक व फीजेंट-टेल्ड जैकाना केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान भरतपुर व जोधपुर झाल पर प्रजनन के लिए हर साल पहुंचते हैं। जोधपुर झाल पर फीजेंट-टेल्ड जैकाना का प्रजनन प्रारंभ हो चुका है। वर्तमान में 5-6 जोड़े हैं। प्रजनन काल में इस पक्षी की लंबी, आकर्षक पूंछ तथा सुनहरे-सफेद रंग का शरीर इसकी सुंदरता को और बढ़ा देता है। यह पक्षी तैरती हुई जलीय वनस्पतियों पर घोंसला बनाता है।
यह पक्षी कर रहे अठखेलियां
वाटरकॉक, पेंटेड स्टॉर्क, फीजेंट-टेल्ड जैकाना, ब्राउन क्रेक, नॉब-बिल्ड डक, लेसर व्हिस्लिंग डक, इंडियन स्पॉट-बिल्ड डक, पर्पल हेरॉन, पर्पल स्वैम्पहेन, ग्रे हेरॉन, सारस क्रेन, वूली-नेक्ड स्टॉर्क, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, ब्लैक-हेडेड आइबिस तथा यूरेशियन स्पूनबिल आदि।