मुकुल द्विवेदी को न्याय के लिए शुरू हुई मुहिम
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पुलिस स्मृति दिवस पर 21 अक्तूबर को जांबाज याद किए जाएंगे। मथुरा में जवाहरबाग खाली कराते वक्त शहीद हुए एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष कुमार की वीरगाथा पुलिस वालों के समक्ष पढ़ी जाएगी। दोनों के परिवारीजनों को लखनऊ बुलाया गया है।
दो जून की शाम को जवाहरबाग खाली कराते वक्त भीड़ ने तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी पर हमला कर दिया था। उनके सिर में गंभीर चोटें आईं थीं जिसके कारण उनकी मौत हो गई थी। थानाध्यक्ष संतोष कुमार पर हमलावरों ने गोली चला दी थी। वह भी शहीद हो गए थे। पुलिस ने किसी तरह से जवाहर बाग को रामवृक्ष के कब्जे से खाली करा लिया था।
इन दोनों की जांबाजी हमेशा पुलिस फोर्स में याद रखी जाएगी। एसएसपी मोहित गुप्ता ने बताया कि शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष कुमार के परिवार वालों को लखनऊ बुलाया गया है। इनकी मौजूदगी में ही वहां स्मृति दिवस का आयोजन होगा।
एसपी सिटी को छोड़कर भाग गए थे पुलिस वाले
दो जून की शाम को पांच बजे का वक्त था। एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी अपने साथ फोर्स को लेकर जवाहरबाग खाली कराने के लिए गए थे। जैसे ही जेसीबी से दीवार को तुड़वाकर वह भीतर दाखिल हुए भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगी थी। जिस वक्त भीड़ में एसपी सिटी घिरे थे तब सारे पुलिस वाले उन्हें छोड़कर भाग गए थे। कई पुलिस अधिकारी भी वहां से निकल भागे थे। एसपी सिटी ने फोर्स को आवाज भी लगाई लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अगर उस समय सभी ने थोड़ी सी हिम्मत दिखाई होती तो शायद मुकुल द्विवेदी आज जीवित होते।