नंदगांव की जन्माष्टमी अपने आप में अनूठी है। यहां वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार रक्षा बंधन के आठ दिन बाद श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार शनिवार को जन्माष्टमी के साथ नंदगांव में परंपरा, भक्ति और लोक संस्कृति का ऐसा संगम देखने को मिलेगा, जिसकी प्रतीक्षा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को रहती है।
जिस घड़ी का इंतजार ब्रजवासियों को पूरे साल रहता है, वह घड़ी अब करीब है। नंदबाबा की नगरी शनिवार को एक बार फिर उस अलौकिक क्षण की साक्षी बनेगी, जब काली अंधियारी रात के बीच मध्यरात्रि ठीक 12 बजे नंदभवन में यशोदानंदन के जन्म के दर्शन होंगे। जन्म की खबर मिलते ही नंदगांव कृष्ण के जयकारों से गूंज उठेगा और चारों ओर एक ही स्वर सुनाई देगा-नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।
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नंदगांव की जन्माष्टमी अपने आप में अनूठी है। यहां वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार रक्षा बंधन के आठ दिन बाद श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार शनिवार को जन्माष्टमी के साथ नंदगांव में परंपरा, भक्ति और लोक संस्कृति का ऐसा संगम देखने को मिलेगा, जिसकी प्रतीक्षा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को रहती है।
दोपहर से शुरू हुई लाला के जन्म की बधाई
जन्मोत्सव का रंग दोपहर से ही चढ़ने लगेगा। करीब साढ़े 12 बजे नंदभवन में नंदगांव के गोस्वामी समाज द्वारा अष्टछाप के कवियों और अन्य महानुभावों की वाणियों का समाज गायन किया। घंटों तक चलने वाले इस गायन में कृष्ण जन्म की बधाइयां और भक्ति पद वातावरण को कृष्णमय कर देंगे। शाम होते-होते उत्सव का रंग और गहरा हो गया। बरसाना के गोस्वामीजन अपनी पारंपरिक वेशभूषा धोती-बगलबंदी में सजकर नंदभवन पहुंचेंगे। इसके बाद नंदगांव और बरसाना के गोस्वामी समाज के बीच संयुक्त समाज गायन हुआ। दोनों गांवों के बीच सदियों पुरानी आत्मीयता और कृष्णकालीन लोक परंपराओं की झलक इस आयोजन में दिखाई दी। समाज गायन के बाद बरसाना से आए गोस्वामी समाज को परंपरानुसार बधाई के लड्डू भेंट किए गए।