जयगुरुदेव आश्रम पर शुक्रवार से आयोजित होने वाले सत्संग-मेला के लिए श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है। इलाहाबाद, गाजीपुर, बस्ती, कानपुर नगर, जौनपुर, रायबरेली, बाराबंकी, प्रतापगढ़, सतना, अशोक नगर, रतलाम, शहडोल, दाहोद, सूरत , महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान उड़ीसा आदि जिलों और प्रांतों के भंडारे प्रारंभ हो गए हैं।
सुबह सत्संग में राष्ट्रीय उपदेशक डा. करुणाकान्त ने कहा कि आत्म कल्याण के लिए मानव जीवन में सच्चे गुरु की प्राप्ति बड़े भाग्य की बात है। बिना सतगुरु के भव पार जाना संभव नहीं है। सत्संग के पूर्व प्रार्थना, सुमिरन, ध्यान और भजन की साधना का भी अभ्यास कराया गया।
शाम को सत्संग में राष्ट्रीय उपदेशक सतीश चन्द्र ने मानव जीवन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शारीरिक आवश्यकताओं के लिए बनाए गए सभी साधन सारहीन और असत्य हैं। सत्य की खोज करनी चाहिए। बिना सत्य की खोज के मानव जीवन सफल नहीं होगा। उन्होंने बाबा जयगुरुदेव के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भी प्रकाश डाला।
मेले के निमित्त आगंतुकों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। बाईपास पर मेले की रौनक दिखाई देने लगी है। जयगुरुदेव नाम योग साधना मंदिर की सजावट रात्रि के समय मनमोहक लगती है।