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UP: 'धर्मांतरण का लेंगे बदला...', जगद्गुरु रामभद्राचार्य बोले- लड़कियां लक्ष्मीबाई बनें; संतों को दी ये सीख

Tue, 19 Aug 2025 10:36 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि हम मंदिरों के सरकारी अधिग्रहण के सख्त खिलाफ हैं और इसका हर स्तर पर विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय मुझे बुलाता है तो मैं राम जन्मभूमि की तरह इस श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में भी पूरी मजबूती से पक्ष रखूंगा।
 
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रसिद्ध संत और जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने वृंदावन में आयोजित कथा कार्यक्रम के दौरान कई समसामयिक सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने धर्मांतरण, लव जिहाद, मंदिरों के अधिग्रहण, संत समाज की स्थिति और श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले पर स्पष्ट और दृढ़ विचार रखे। महाराज ने धर्मांतरण को एक गंभीर समस्या बताया और कहा कि यह समाज को तोड़ने का कार्य कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह ठीक नहीं है। हम इसका बदला लेंगे। सनातन धर्म के साथ खिलवाड़ करने वालों को जरूर प्रसाद देंगे। 
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रामभद्राचार्य महाराज ने हिंदू लड़कियों से अपील करते हुए कहा कि वे सजग रहें और लव जिहाद जैसे प्रपंचों से बचें। उन्होंने कहा, लड़कियों को अब समझ जाना चाहिए। उन्हें रानी लक्ष्मीबाई की तरह साहसी बनना होगा। जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने मंदिर अधिग्रहण का कड़ा विरोध किया। 

 

उन्होंने कहा कि हम मंदिरों के सरकारी अधिग्रहण के सख्त खिलाफ हैं और इसका हर स्तर पर विरोध करेंगे। श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर उन्होंने बताया कि 22 अगस्त को इस मामले में सुनवाई है। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय मुझे बुलाता है तो मैं राम जन्मभूमि की तरह इस मामले में भी पूरी मजबूती से पक्ष रखूंगा।

 

संत समाज और युवा पीढ़ी को दिए संदेश
महाराज ने युवा पीढ़ी को पढ़ाई-लिखाई में मन लगाने और संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने वर्तमान संत समाज की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आजकल कई संत मठ और मंदिर तो बना रहे हैं, लेकिन वे अध्यात्म और शास्त्र अध्ययन से विमुख होते जा रहे हैं। यह स्थिति चिंताजनक है। 

 
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हाल ही में कुछ संतों द्वारा महिलाओं को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणियों पर उन्होंने नाराजगी जताई और कहा कि ऐसे संतों को सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए। संत का आचरण ही उसका सबसे बड़ा संदेश होता है।

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