बर्बादी के दौर में भी जिले के किसानों से मुनाफा कमाने वाली बीमा कंपनी चोला मंगलम को फिर से फसल बीमा की जिम्मेदारी दे दी गई है। क्रॉप लोन लेने वाले जिले के किसानों को मजबूरी में इस कंपनी से ही फसल बीमा कराना पड़ रहा है। जिले में अब तक खरीफ की फसल का बीमा 63 हजार किसान करा चुके हैं।
पिछली रबी की फसल में जिले के किसानों की तबाही ने प्रदेश ही नहीं देश भर का ध्यान अपनी ओर खींचा। ओलावृष्टि और बेमौसम बरसात से बर्बाद हुई फसल को देख करीब 48 किसान मौत का शिकार भी हुए। जिला प्रशासन ने भी जिले में गेहूं की फसल को शतप्रतिशत ओलावृष्टि से प्रभावित घोषित किया, लेकिन चोला मंडलम बीमा कंपनी ने इन हालातों में भी मुनाफा कमाने का फार्मूला निकाल लिया। 18 हजार से ज्यादा किसानों से फसल बीमा का प्रीमियम लेने वाली इस कंपनी ने 13206 किसानों को ही बीमा का लाभ दिया। इसमें भी किसानों को बीमा प्रीमियम के बराबर भी क्लेम नहीं दिया गया।
जिले से 5.25 करोड़ रुपये प्रीमियम पाने वाली बीमा कंपनी ने सिर्फ 4.92 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया है। इससे पूर्व भी इस कंपनी ने किसानों के साथ यही बर्ताव किया था। बीमा कंपनी के इस आकलन से किसानों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने इसकी जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन यह हवा हवाई साबित हुआ। अब वही कंपनी एक बार फिर किसानों से फसल बीमा का प्रीमियम वसूल रही है। यह वसूली बैंक और सहकारिता के माध्यम से क्रॉप लोन की मजबूरी में किसानों से की जा रही है। अब तक बैंकों के माध्यम से 51 हजार और सहकारिता के 12 हजार से ज्यादा किसानों से फसल बीमा काट लिया गया है।
ऋण की खातिर अदा कर रहे बीमा प्रीमियम
बैंक और सहकारिता से फसल ऋण चाहिए तो जबरन फसल बीमा का प्रीमियम देना होगा। किसानों को पता है कि यह प्रीमियम किसानों के हित के लिए बीमा कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए वसूला जा रहा है। लेकिन, ये मजबूरी है। यह पीड़ा जिले के उन किसानों की है जो ऋण की खातिर फसल बीमा प्रीमियम अदा कर रहे हैं। धर्मपाल, मोहन सिंह चौमुंहा, भगवान सिंह छटीकरा ने कहा कि पिछली खरीफ और रबी की फसल में बीमा कराने के बाद किसानों को बीमा कंपनी ने झुनझुना थमा दिया है। अब ऋण पाने के लिए मजबूरी में यह भुगतान करना पड़ रहा है।