सर्वे के दौरान अति कुपोषित की श्रेणी में पाए गए 25000 बच्चों को अब स्वस्थ करने की मुहिम शुरू की गई है। इसके लिए सबसे पहले इन बच्चों के ब्लड और यूरिन की जांच कर कुपोषण के कारण खोजे जाएंगे। यह जांच सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर की जाएंगी।
जिले के नवजात से लेकर पांच साल तक के बच्चों में कुपोषण की स्थिति भयावह होती जा रही है। 2014 में हुए कुपोषण सर्वे की तुलना में हाल ही में दिसंबर में हुए सर्वे में कुपोषित बच्चों की संख्या और बढ़ गई। 14000 की तुलना में इस साल 25,659 बच्चे अति कुपोषित पाए गए।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिल दत्तात्रेय ने बताया कि बच्चों के रक्त और यूरिन की जांच कराने के लिए एएनएम और आंगनबाड़ियाें की ड्यूटी लगाई जाएगी। साथ ही शहर, कस्बा और 10 ब्लाकोें के सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की टीम बच्चों की जांच करेगी।
जिन बच्चों के रक्त और यूरिन में ज्यादा कमी पाई जाएगी उन्हें वृंदावन स्थित सौ शैया अस्पताल में बने राष्ट्रीय पोषित पुनर्वास केंद्र में रखा जाएगा। अन्य बच्चों को बाल पुष्टाहार दो गुना दिया जाएगा।