उत्तर प्रदेश महिला कल्याण निगम की चेयरमैन गीता सिंह ने गुरुवार को महिला आश्रय सदनों का औचक निरीक्षण किया। विधवा और निराश्रित महिलाओं को मिली रही सुविधाओं की जांच की। सफाई आदि व्यवस्थाओं में कमी मिलने पर निगम कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से कमियों को दूर करने का आदेश दिया। कहा कि महिला आश्रय सदनों में अभी सुधार की जरूरत है। उन्होंने सदन के जीर्णोद्धार कार्य को मई तक पूरा करने को कहा।
दोपहर के समय चैतन्य बिहार स्थित महिला आश्रय सदन पहुंचीं महिला कल्याण निगम की चेयरमैन ने महिलाओं से उनका हाल जाना और मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने सदन में कार्यरत कर्मचारियों से बंद कमरे में वार्ता कर रजिस्टरों की पड़ताल की। सदन में साफ-सफाई न मिलने पर नाराजगी जताई और मच्छर-मक्खी हटाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव करानेे को कहा।
वृद्धा के कई दिनों से स्वास्थ्य खराब होने की बात कहने पर उन्होंने नाराजगी जताई और सदन में नियुक्त चिकित्सक को बुलाने को कहा। उन्हें सदन में 24 घंटे चिकित्सक न होने और एक नर्स की नियुक्ति की जानकारी दी। प्रदेश सरकार की ओर से तीन करोड़ की लागत से कराए जा रहे सदन के जीर्णोद्धार कार्य की प्रगति देखी और मई 2016 तक कार्य पूर्ण करने के आदेश दिए।
उन्होंने कहा कि सदनों में जो कमियां है उनमें सुधार की जरूरत है और इसके लिए हर संभव प्रयास निगम कर रहा है। सदन के प्रभारी संतोष मिश्रा, शक्ति सिंह, सपा महिला सभा की जिलाध्यक्ष बबिता सिंह, अंकित वार्ष्णेय, नकुल सिंह राजावत, योगेश सिसौदिया, शुभम राजावत, अमित मिश्रा भी मौजूद रहे।
सुलभ इंटरनेशनल को अलग से कमरा देने पर जताई आपत्ति
निगम चेयरमैन गीता सिंह को आश्रय सदन के एक कमरे में सुलभ के शिक्षकों को बैठा देखकर गुस्सा आ गया। सरकारी आश्रय सदन में सुलभ के लिए अलग से कमरा आवंटित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए सुलभ के अमित, माया, नयन, मीनाक्षी से उनके काम की जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि किसके कहने पर आप आश्रय सदन में रुके हैं। उन्होंने कहा कि आओ, काम करो और जाओ। यहां पंचायत करने का काम नहीं करेगा सुलभ इंटरनेशनल। महिला आश्रय सदनों में रह रही विधवा, वृद्ध और निराश्रित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुलभ इंटरनेशनल संस्था व्यवसायिक प्रशिक्षण दे रहा है।