सरकार को करोड़ों का राजस्व देने वाले उद्योग मूलभूत जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। यूपीएसआईडीसी द्वारा विकसित औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी और सड़कें बस कागजों तक ही सीमित है। हकीकत इतनी कड़वी है कि बरसात में उद्यमी अपनी यूनिटों तक भी बमुश्किल पहुंच पाते हैं।
उत्तर प्रदेश राजकीय औद्योगिक इकाई (यूपीएसआईडीसी) ने 80 के दशक में महोली रोड माल गोदाम रोड पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया था। उस समय उद्यमियों को जल निकासी, सड़क, पानी जैसी मूलभूत जरुरतों को पूरी करने की बात कही थी।
सरकार ने भी अपनी औद्योगिक नीति में इस बात की प्रतिबद्धता जताई है। फिर भी हालात इसके ठीक उलट हैं। माल गोदाम रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र में जगह-जगह जलभराव इस रोड की पहचान बन गया है। दो-दो फुट गहरे गड्ढे राहगीरों का ही नहीं लोडिंग वाहनों का रास्ता भी रोक लेते हैं। बरसात में आलम ये है कि उद्यमी अपनी फैक्ट्रियों तक ही बमुश्किल पहुंच पा रहे हैं।
औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी की समस्या विकराल होती जा रही है। बरसात के समय कई यूनिटों में तो बरसात का पानी भर जाता है। इन हालातों में कारोबार को छोड़ इस समस्या से निजात की जुगत भिड़ानी पड़ती है।
यादवेंद्र अग्रवाल, उपाध्यक्ष इंडस्ट्रीज एसोसिएशन मथुरा
औद्योगिक क्षेत्र में टूटी सड़क, जलभराव ने कई मुसीबतें खड़ीं कर दी हैं। आए दिन वाहन इनमें फंस जाते हैं, जिसके चलते कारोबारियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हेमंत अग्रवाल, युवा उद्यमी मथुरा
मथुरा में औद्योगिक इकाइयां
- निकिल और वाइब्रेटर इकाइयां- 64
- टोंटी फैक्ट्री - 45
- साड़ी फैक्ट्री- 50
- प्रिंटिंग प्रेस- 50
- फ्लोर और ऑयल मिल- 40
- निबाड़ फैक्ट्री- 12