समझौता के दौरान मौजूद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और अन्य गणमान्य।
मथुरा। प्रदेश में देशी नस्ल की गायों के संरक्षण और उनकी दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राज्य के चार पशु चिकित्सा एवं कृषि विश्वविद्यालयों ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मौजूदगी में गुजरात की प्रसिद्ध बनास डेयरी के साथ महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक प्रगति के माध्यम से स्वदेशी गोवंश का अनुवांशिक सुधार करना और पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है।
इस समझौते के तहत प्रदेश में देशी नस्लों के गोवंश (गिर, साहिवाल और थारपारकर व अन्य) के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। देशी नस्लों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है लेकिन दुग्ध उत्पादकता कम होने के कारण पशुपालक इनसे विमुख हो जाते हैं। अब बनास डेयरी के तकनीकी सहयोग से विश्वविद्यालयों में संयुक्त शोध, संकाय आदान-प्रदान तथा ज्ञान-साझाकरण मंचों को बढ़ावा मिलेगा ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान को डेयरी क्षेत्र की व्यवहारिक आवश्यकताओं से जोड़ा जा सके। यह समन्वय पशु विज्ञान और डेयरी प्रबंधन में नवाचार एवं तकनीकी उन्नति को गति देगा। इस समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर के दौरान प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व चारों विवि के कुलाधिपति और गुजरात विधानसभा अध्यक्ष व बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी मौजूद रहे।
रोजगार के खुलेंगे द्वार
वेटरनेरी विवि के प्रोफेसर डीडी सिंह ने बताया कि बनास डेयरी एशिया की सबसे बड़ी दुग्ध डेरियों में से एक है। यह यूपी के पशुपालकों को बाजार और तकनीक दोनों उपलब्ध कराएगी। इस एमओयू से यह सुनिश्चित होगा कि गांवों में पलने वाली देशी गाय अब घाटे का सौदा नहीं रहेंगी। अनुवांशिक सुधार के बाद जब दूध की मात्रा बढ़ेगी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा संबल मिलेगा। यह कदम प्रदेश में श्वेत क्रांति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला साबित होगा।