मथुरा। शहर का कोई बाजार, मुहल्ला और कालोनी ऐसी नहीं जहां अतिक्रमण रूपी राक्षस ने अपनी जड़ें न जमा रखी हों। सड़कों तक दुकानें आ गईं हैं। फुटपाथ खत्म हो गए हैं। नालों पर इमारतें खड़ीं हो गईं लेकिन जिम्मेदार खामोश हैं। अब तो हर कोई कहने लगा... इस अतिक्रमण पर ‘आक्रमण’ कब होगा राम।
चलिए हम होलीगेट से ही शुरूआत कर लेेते हैं। हार्ट ऑफ सिटी कहते हैं इस इलाके को। यह इलाका खुला-खुला होना ही चाहिए था। सबसे ज्यादा कब्जे यही हैं। दुकान के आगे दुकान खुल गई है यहां। फुटपाथ गुम हो गया है।
जनरलगंज की ओर या फिर रंगेश्वर जाने वाली सड़क पर कब्जे ही कब्जे हैं। भरतपुर गेट से डीगगेट तक सड़कों पर मार्केट आ गया है। इस रास्ते में दुकान से ज्यादा सामान सड़क पर लगा है। करीब 70 फीट चौड़ी सड़क अतिक्रमण से 40 फीट रह गई है। क्वालिटी चौराहा पर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के लिए सड़क कब्जा ली गई है। यहां से डेंपियर तक अतिक्रमण है। धौलीप्याऊ में सड़क पर दुकानदार और ढकेल वालों ने कब्जा कर लिया है। 100 फुटा महोली रोड 30 से 40 फीट का रह गया है। कृष्णा नगर के रास्ते को भी निरंतर अतिक्रमण निगल रहा है। यहां सड़क पर स्थायी कब्जा किया जा रहा है। किसी शोरूम के सामने सीढ़ियां बना ली हैं तो किसी ने पार्किंग बना दी है। जनरेटर की हिफाजत के लिए सड़क पर कोठरी तो आम बात बन गई है।
यह हाल तो शहर के प्रमुख बाहरी रास्तों का है। अंदरूनी सड़कों को देखकर तो दम घुटता है। छत्ता बाजार, द्वारिकाधीश क्षेत्र, विश्रामघाट बाजार, स्वामीघाट बाजार, चौक बाजार, वृंदावन रोड, घीयामंडी और मंडी रामदास की सड़क की राह तो बेहद तंग हो गई है। इसके लिए जिम्मेदार प्रशासनिक और नगर पालिका के अफसर तमाशा देख रहे हैं। यदा-कदा छोड़ सड़कों पर हो रहे अतिक्रमण को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया है। खासकर स्थायी अतिक्रमण तो अफसरों की छत्रछाया में हैं।