मैया लाला कू डांटैं, तैने माटी क्यों खाई, लाला बोलै, मैया मैंने नाय खाई। अच्छा तौ जे सब झूठ बोलैं। सही था, कनुआ नै माटी नाय चखी, ब्रज रज कौ रसपान कियो। वो ही रस या पुस्तक मै आपकू मिलैगौ क्याेंकि जे रस ब्रज रज कौ है। इस रज में गोपी, गोपिकाओं, ब्रजवासियों के पगों का रस सिंचित है।
यह पुस्तक ब्रज की भौगोलिक भागवत है। बुधवार को ‘रस ब्रज रज कौ’ पुस्तक के विमोचन समारोह में मुख्य वक्ता राधा रमण मंदिर, वृंदावन के सेवायत विद्वान आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने उपरोक्त उद्गार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि मथुरा की सांसद हेमामालिनी ने कहा कि यह बहुत सुंदर पुस्तक है। इससे कृष्ण भक्तों को उनकी लीला स्थलियों तक जाने में आसानी होगी। ‘रस ब्रज रज कौ’ में वर्णित छोटे-छोटे स्थलों पर महोत्सव रखे जाएं ताकि उनका प्रचार-प्रसार हो। खुशी होती है कि मुझे ब्रज का काम करने का सौभाग्य मिला है। आप लोगों का सपना पूर्ण हो, इसके लिए मैं पूरे प्रयास करूंगी।
बुधवार को दोपहर 12 बजे ठाकुर के निज धाम में स्थित रामकृष्ण मिशन सभागार में अमर उजाला द्वारा प्रस्तुत पुस्तक ‘रस ब्रज रज कौ’ ब्रज यात्रा का विमोचन हुआ। इससे पूर्व सभी गणमान्य अतिथियों ने बांके बिहारी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विजय किशोर मिश्र के मंगलाचरण ने वातावरण को भक्तिमय कर दिया। अमर उजाला के स्थानीय संपादक राजेंद्र त्रिपाठी ने ‘रस ब्रज रज कौ’ ब्रज यात्रा के बारे में जानकारी दी। समारोह की अध्यक्षता कर रहे मान मंदिर बरसाना के विरक्त संत रमेश बाबा ने कहा कि यह पुस्तक भक्ति भाव की अनुभूति कराती है। भाव के बिना इतना सुंदर कार्य नहीं हो सकता। अमर उजाला का यह बड़ा सार्थक प्रयास है।
विशिष्ट अतिथि गोकुल के पुष्टिमार्गीय आचार्य पंकज बाबा, पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा के कुलपति डॉ. एसी वार्ष्णेय, रामकृष्ण मिशन मठ के महंत सुप्रकाशानंद, एमवीडीए के उपाध्यक्ष नगेंद्र प्रताप सिंह थे। समारोह का संचालन आकाशवाणी के उद्घोषक रहे राधाबिहारी गोस्वामी ने किया।