मथुरा। जिला अस्पताल मथुरा में मानसिक रोगियों के इलाज की सुविधा वर्षों से ठप पड़ी है। मानसिक रोग विशेषज्ञ (साइकेट्रिस्ट) के पद पर वर्षों से कोई चिकित्सक तैनात नहीं है। ऐसे में मरीजों को साइकोलॉजिस्ट (मनोवैज्ञानिक) से इलाज लेना पड़ता है। या फिर बिना इलाज लिए ही लौटना पड़ता है। वहीं स्थिति गंभीर होने पर मरीज को मजबूरी में आगरा या बरेली रेफर कर दिया जाता है।
महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि मानसिक रोग विशेषज्ञ न होने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मानसिक रोगों से पीड़ित मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में समुचित इलाज नहीं मिल पाता। मजबूरी में जिला अस्पताल से उन्हें आगरा या बरेली रेफर करना पड़ता है। मथुरा जैसे बड़े जिले में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का ठप होना स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर खामी को उजागर करता है।
दूर दराज से आने वाले मरीजों और उनके परिजन को निराश होकर लौटना पड़ता है या फिर खर्च और समय बढ़ाकर आगरा अथवा बरेली जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन मुख्यालय को लगातार पत्र भेज रहा है, लेकिन अब तक कोई नियुक्ति नहीं हो पाई है। हर माह नियमित रूप से रिपोर्ट भेजी जा रही है, फिर भी समाधान नहीं हो पाया है।
दवा नहीं लिख सकते साइकोलॉजिस्ट
साइकेट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) के अभाव में जिला अस्पताल में साइकोलॉजिस्ट (मनोवैज्ञानिक) नीतू सिंह से काम चलाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइकोलॉजिस्ट मरीजों को दवा नहीं लिख सकते, बल्कि मरीजों की काउंसिलिंग, बातचीत और थेरेपी कर सकते हैं। वहीं, साइकेट्रिस्ट एक मेडिकल डॉक्टर है, जो दवाएं लिख सकते हैं।