मथुरा। कभी जिस कालिंदी (यमुना जी) के पास महायोगी भगवान श्रीकृष्ण ने लीलाएं की थीं आज वह महानगर के 35 नालों की गंदगी को अपने आप में समाहित करने को मजबूर हैं। सुप्रीम कोर्ट से लेकर साधु-संत भी नाराजगी जता चुके हैं। वहीं, नमामि गंगे योजना के तहत अभी तक एक भी नाले को बंद नहीं किया जा सका है।
करीब एक वर्ष पूर्व प्रारंभ हुई 500 करोड़ की नमामि गंगे योजना की नालों को टेप (बंद) करने की योजना फिलहाल यमुना प्रदूषण के लिए भारी पड़ती जा रही है। मथुरा-वृंदावन के कुल 35 नालों में से प्रतिदिन 32 नालों को गंदा पानी सीधे यमुना में मिल रहा है। इसमें से तीन नालों की स्क्रीनिंग कर पानी जमुनापार एसटीपी को भेजने का दावा किया जा रहा है। यह सभी नालों का गंदा पानी यमुना के शहरी क्षेत्र से ही गिर रहे हैं, जो लगभग 50 किलोमीटर के सीवर से गुजरते हैं।
दो विभाग हैं जिम्मेदार
नालों को गंदे ानी के यमुना में गिरने को लेकर दो विभागों पर जिम्मेदारी है। जल निगम द्वारा गंदा पानी एसटीपी तक पहुंचाने का है जबकि सीवर को साफ करने की जिम्मेदारी नगर निगम के जलकल विभाग की है।
जब तक नाले टेप नहीं होंगे तब तक जाएगा गंदा पानी
नमामि गंगे योजना के तहत नालों को टेप करने का काम चल रहा है। अभी तक हमने असकुंडा घाट, बंगाली घाट तथा विश्राम घाट के नालों में जाली लगा दी है। जहां से गंदा पानी जमुनापार के एसटीपी पर जा रहा है। जब तक नाले टेप नहीं होंगे अन्य नालों को पानी को यमुना में गिरने से नहीं रोका जा सकता है। सभी नालों को टेप होने में अभी कम से कम एक वर्ष का समय लगेगा। शाहगंज, ऑक्ट्राइपोस्ट किशन गंगा, दौला मौला, चक्रतीर्थ घाट, महादेव घाट, वृंदावन गेेट, बंगाली घाट, मसानी नाले की टैपिंग का काम चल रहा है।
-आरपी यादव, परियोजना अभियंता (कार्यकारी परियोजना प्रबंधक)
हमारे पास सफाईकर्मी बहुत कम हैं
जलकल का काम सीवर का रखरखाव तथा सफाई का है। हम कोशिश करते हैं सभी सीवर साफ हो जाएं, परंतु हमारे पास मथुरा में 30 तथा वृंदावन में कुल 20 सफाईकर्मी हैं। जब कि डिमांड इससे कहीं अधिक है।
- रमेश चंद, जीएम जलकल