मानवाधिकारों के अनुपालन को सुदृढ़ बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय आयोग है, आज से नहीं 70 साल से। फिर भी किसी न किसी के अधिकार हर दिन रौंदे जा रहे हैं। बीते 11 महीनों की ही बात करें तो मानवाधिकार उल्लंघन की 455 शिकायत सामने आई हैं। यह संख्या वर्ष 2013 से तीन गुना ज्यादा है। अपने अधिकारों को लेकर लोगों की जागरूकता भी इसका एक कारण बताया जा रहा है।
वर्ष 1945 में अमेरिका में गठित अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने महिला, पुरुष, बच्चों सहित कै दियों, मरीजों और अन्य सभी मानवों के अधिकारों की व्याख्या की। उदाहरण के तौर पर पुलिस कार्रवाई में गिरफ्तारी से पहले तक व्यक्ति के पास संवैधानिक अधिकार रहते हैं। गिरफ्तारी के बाद वह जेल में मानवाधिकार की मदद से जीवन व्यतीत करता है। इसमें पुलिस द्वारा नामजद, आरोपी और सजायाफ्ता व्यक्ति का भोजन से लेकर उसके रहने तक की मौलिक सुविधाएं प्रदान कराना शामिल है। मानवाधिकाराें के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान भी शामिल किया गया है।
अधिकारों को लेकर बढ़ी जागरूकता
जनवरी 2014 से दिसंबर 2014 तक मानवाधिकार उल्लंघन की 455 शिकायत मानवाधिकार सेल को दी र्गइं। इसमें मकान पर कब्जा करना, मारपीट के मामले में रिपोर्ट दर्ज न करना, ज्यादती करने से लेकर अन्य मामले शामिल हैं। संबंधित थानों से इनकी जांच आख्या मांगी गई है। इसमें सौ से अधिक मामले मानवाधिकार आयोग, आगरा से आए। वर्ष 2013 में यह मामले 160 थे, 2012 में यह संख्या 148 थी। जानकार बताते हैं कि मानवाधिकारों को लेकर लोग जागरूक हो रहे हैं। यही वजह है कि शिकायतों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
केस एक- कोतवाली क्षेत्र की निरमा पुत्री रामबाबू कठौती कुआं ने मकान के विवाद को लेकर कोतवाली में दर्ज 769/14 के केस में मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत की है। इसकी जांच आख्या कोतवाली पुलिस से मांगी गई है।
केस दो- आगरा की पथौली निवासी शारदा देवी पत्नी धर्मवीर ने 15 लोगों पर अपने पुत्र से जबरन कागजातों पर दस्तखत कराने को लेकर मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत की। मामले की रिपोर्ट आगरा में दर्ज है। आगरा मानवाधिकार सेल से जांच आख्या मांगी गई है।
केस तीन- गोवर्धन निवासी रोशनलाल पुत्र दामोदर ने मारपीट के मामले की सदर बाजार पुलिस द्वारा रिपोर्ट न लिखे जाने को लेकर मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत की है।
जुल्म की बेड़ियों में जकड़ी आधी आबादी
महिला सुरक्षा को लेकर बहस जारी है। आधी आबादी को बेहतर सामाजिक परिवेश देने की बात भी होती है लेकिन आंकड़े कहते हैं कि महिलाआें पर अत्याचार की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं। जनपद में बीते वर्ष महिलाओं पर अत्याचार के 96 मामले दर्ज हुए थे जबकि अब तक 11 महीने में यह संख्या 114 है।
महिला थानाध्यक्ष विपिन चौधरी बताती हैं कि अब तक प्राप्त हुई शिकायतों में से 85 घरेलू हिंसा की हैं। इनमें पुलिस मध्यस्थता कर सुलह के प्रयास कर रही है। समझौता न होने पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। सभी वादियों को समय समय पर मीडिएशन सेंटर भी बुलाया जाता है। इधर जनपद में दहेज हत्या के मामलों में भी वृद्धि हुई है। पुलिस रिकार्ड के अनुसार 11 माह में अब तक 47 ऐसे मामले हो चुके हैं। बीते वर्ष यह संख्या 30 थी। 2012 में 33 विवाहिताओं को दहेज के दानव लील गए थे।
महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता से लिया जा रहा है। वुमन सेल और पुलिस कंट्रोल रूम पर मिलने वाली शिकायतों को तुरंत इलाका पुलिस से अटेंड कराया जा रहा है। बीते दिनों गोवर्धन के गांव पलसों में एक शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हुई थी।
मंजिल सैनी
एसएसपी, मथुरा