ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के बड़े भाई सूर्यकांत शर्मा और महामंडलेश्वर स्वामी चित्तप्रकाशानंद के बीच गुरुवार को नोकझोंक हो गई। काफी देर तक हंगामा होता रहा। संतों ने कहा कि मंत्री के भाई गलत भाषा का प्रयोग कर रहे थे। कुछ लोगों ने बीच में पड़कर मामले को शांत कराया।
गुरुवार को वात्सल्य ग्राम में राज्यपाल और कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा पहुंचे थे। संतों ने इन लोगों से मिलकर नगर निगम के मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया। संत ऊर्जा मंत्री से भी मिले थे।
श्रीकांत शर्मा से मिलकर लौटे संत नगर निगम के मुद्दे पर अपना विरोध जता रहे थे कि इसी दौरान साध्वी ऋतंभरा के गुरुभाई महामंडलेश्वर स्वामी चित्तप्रकाशानंद और श्रीकांत शर्मा के बड़े भाई सूर्यकांत शर्मा के बीच इस विषय पर बहस शुरू हो गई। कुछ ही देर में नोकझोंक होने लगी।
स्वामी चित्तप्रकाशानंद ने कहा कि हमें पता चला है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा-वृंदावन को मिलाकर नगर निगम बनाए जाने के लिए दो बार ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से पूछा, वह इसके पक्ष में रहे हैं। श्रीकांत शर्मा ने वृंदावन को अलग पालिका के रूप में बरकरार रखने का पक्ष नहीं लिया है।
श्रीकांत शर्मा मथुरा-वृंदावन को नगर निगम बनाए जाने पर अड़े हैं। यह सुनकर ऊर्जामंत्री के भाई सूर्यकांत शर्मा का पारा चढ़ गया। उन्होंने कहा कि यह आरोप गलत है। श्रीकांत शर्मा का कोई लेना देना नहीं है। विवाद बढ़ने पर भाजपा के नेताओं ने किसी तरह मामले को शांत कराया।