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नंदगांव पहुंचेगा निमंत्रण, बरसाना में बरसेंगे लड्डू

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नंदगांव (मथुरा)। नंदगांव के हुरियारों के इंतजार की सीमा मंगलवार को समाप्त हो जाएगी। इसके बाद हुरियारे अपनी तैयारियों में जुट जाएंगे। राधाजी महल से आज कन्हैया को होली खेलने का निमंत्रण मिलेगा। मंगलवार को बरसाना के श्रीजी महल से नंदगांव के नंदभवन में होली का निमंत्रण सखियों के हाथ पहुंचेगा।
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निमंत्रण के बाद नंदभवन में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। दूसरी ओर, राधा के गांव बरसाना में भी लड्डू होली का आयोजन मंदिर परिसर में किया जाएगा। बूंदी के लड्डू, श्रद्धालुओं पर बरसाए जाएंगे। बरसाना-नंदगाव की विश्व प्रसिद्ध लठामार होली का निमंत्रण लेकर राधाजी की सखियां बरसाना के श्रीजी मंदिर से पैदल चल कर सुबह 10 बजे नंदभवन पहुंचेंगी।
इस दौरान पहले से निमंत्रण की उत्सुकता में पलक पांवड़े बिछाए नंदगांव के ग्वाल निमंत्रण स्वरूप आए गुलाल को नंदबाबा एवं कन्हैया के चरणों में रखेंगे और बरसाना होली खेलने की तैयारी में लग जाएंगे। फाग आमंत्रण महोत्सव के दौरान कान्हा के घर नंदभवन में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। संध्या के समय बरसाना के श्रीजी महल में हजारों किलो लड्डुओं की बरसात होगी। स्थानीय लोग लड्डू होली की संज्ञा देते हैं। देश के विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालु उन लड्डुओं को लपकने के लिए आतुर दिखाई देंगे। 4 मार्च को बरसाना में और 5 मार्च को नंदगांव में विश्व प्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन होगा।
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निमंत्रण मिलते ही सखियों को नृत्य के लिए खींच ले जाते हैं हुरियारे
बरसाना से लठामार होली खेलने के लिए आए निमंत्रण को समाज में सुनाया जाएगा। मंदिर के चारों ओर घूम-घूम कर हेला लगाया जाएगा कि वृषभानुपुर से वृषभानु जी कौ होरी कौ बुलायबौ आयौ है सब ग्वाल बाल होरी खेलवे के तांईं बरसाने आमंत्रित हैं। निमंत्रण की सुन सभी ग्वाल मदमस्त हो जाते हैं और नंदभवन में जमकर रसिया होली का आयोजन किया जाता है।
लगभग दो घंटे से भी अधिक समय तक नंदभवन में होली के रसियों की धूम मचती है। इसके बाद बरसाने से आईं सभी सखियों को राजभोग कराया जाता है और ठाकुर जी का भोग प्रसाद भेंट कर सप्रेम विदा किया जाता है। हुरियारे लठामार होली की तैयारियों में जुट जाते हैं। संध्या के समय प्रतीकात्मक रूप से नंदबाबा द्वारा होली का न्यौता स्वीकार किए जाने के बाद बरसाना में लड्डू होली की धूम मचती है।
पुरोहित की जगह अब सखी लाती हैं निमंत्रण
समय के साथ-साथ लठामार होली से संबंधित प्रथाओं में भी परिवर्तन दिखने लगा है। कई प्रथाएं बदलते परिवेश के साथ-साथ खुद व खुद ही बदलती जा रही हैं। पूर्व प्रवक्ता एवं नंदबाबा मंदिर के सेवायत विजेंद्र गोस्वामी ने बताया कि दशकों पहले बरसाना से होली का निमंत्रण वहां का पुरोहित या साधु लेकर आता था। इस बात का प्रमाण नंदबाबा की वार्षिकोत्सव समाज पुस्तिका में भी आता है। लेकिन अब सखी निमंत्रण लाती है।
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