ब्रज के प्राचीन द्वारिकाधीश मंदिर में होली के नित नए रंग श्रद्धालुओं को निहाल कर रहे हैं। प्रात: राजभोग झांकी के दौरान ‘मेरी चूनर में लग गयौ दाग री, जानै कैसौ चटक रंग डारौ...’, होरी खेलन आयौ श्याम आज जाय रंग में बोरो री... जैसे होली गायन के बीच मंदिर में गुलाल की मार भक्तों को आनंदित कर देती है। इस दौरान श्रद्धालु नाचने और गाने लगते हैं। फाल्गुन माह की पूर्णिमा को ही मंदिर में होली का डांढ़ा गढ़ जाता है और पड़वा के दिन से राजभोग झांकी में ढोल, ढप की थापों पर होली गायन होता है। इसी क्रम में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ने लगी है।
होलाष्टक से दोगुना होगा उल्लास
मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया 16 मार्च को होलाष्टक शुरू होेने के साथ ही मंदिर में रंगभरनी पिचकारियों का चलन शुरू हो जाता है। ठाकुर द्वारा रंग की होली खेलने के साथ ही मंदिर में प्रांगण में होली का उल्लास दोगुना हो जाता है। 19 मार्च रंगभरनी एकादशी को द्वारिकानाथ कुंज में विराजमान होकर भक्तों के साथ होली खेलेंगे। ठाकुरजी के ये अद्भुत दर्शन सुबह 10 बजे से 11 बजे तक होंगे। 21 मार्च त्रयोदशी को मंदिर में भव्य बगीचे का मनोरथ मनाया जाएगा।