ब्रजभूमि में के गांव फालैन में भक्त प्रहलाद की लीला को आज भी पंडा परिवार जीवंत किए है। कोसी से सात किलोमीटर दूर इस गांव में 6 मार्च को सुबह चार बजे हीरालाल प्रचंड अग्नि से गुजर कर फिर से चमत्कार दोहराएंगे। जटवारी में 5 मार्च को सुनील पंडा धधकती आग से निकलेंगे।
गोपालजी मंदिर के संत बालकदास फालैन में मंदिर और कुंड निर्माण की कहानी बताते हैं। मान्यता है कि गांव के निकट ही साधु तप कर रहे थे। उन्हें स्वप्न में डूगर के पेड़ के नीचे एक मूर्ति दबी होने की बात बताई। इस पर गांव के कौशिक परिवारों ने खोदाई कराई।
जिसमें भगवान नृसिंह और भक्त प्रहलाद की प्रतिमाएं निकलीं। प्रसन्न होकर तपस्वी साधु ने आशीर्वाद दिया कि इस परिवार का जो व्यक्ति शुद्ध मन से पूजा करके धधकती होली की आग से गुजरेगा, उसके शरीर में स्वयं प्रहलादजी विराजमान हो जाएंगे। आग की ऊष्मा का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इसके बाद मंदिर बनवाया गया। पास ही प्रह्लाद कुंड का निर्माण हुआ और तब से आज तक प्रहलाद लीला को साकार करने के लिए फालैन गांव में आसपास के पांच गांवों की होली रखी जाती है। सभी गांवों के लोग होली नृत्य करते, ढोल मजीरे बजाते, गुलाल अबीर की बरसात करते हुए प्रहलाद मंदिर पर पहुंचते हैं। मंदिर पर पूजा अर्चना और कुंड में आचमन करने के बाद 30 फुट व्यास की होली को अंतिम रूप दिया जाता है।
इसकी उंचाई भी 10 से 15 फुट होती है। सामान्य होली से इसे अलग तरीके से बनाया जाता है। कौशिक परिवार के ही सदस्य हीरालाल जलती होली से गुजरने का चमत्कार करेंगे।। वे फाल्गुन शुक्ल एकादशी से अन्न का परित्याग करने के बाद पूजा पर बैठे हैं। वहीं शेरगढ़ के गांव जटवारी में सुनील पंडा होलिका में उतरेंगे। दोनों ही युवा पंडा पहली बार इस अग्निपरीक्षा के लिए तैयार हैं।
जटवारी में गुरुवार की रात करीब दस बजे पंडा निकलेगा तो वहीं गांव फालैन में 5 मार्च से रात भर मेला चलकर 6 मार्च को सुबह चार बजे पंडा आग से निकलेगा।