सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने यमुना में आस्था और विश्वास के साथ डुबकी लगाई। स्नान के बाद पूजा अर्चना की। इसके अलावा महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा अर्चना कर पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना भी की।
सोमवार को सुबह से ही यमुना के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने श्रद्धा के साथ यमुना महारानी की पूजा अर्चना की और परिवार की खुशहाली के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। ज्योतिषाचार्य कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि सोमवती अमावस्या पर चार ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल और बुध की युति में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। मथुरा में इस पर्व का विशेष महत्व है। स्कंद पुराण में वर्णित है कि इस दिन स्नान, दान, शिवार्चन से करोड़ों यज्ञ के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
दो पर्वों का बना संयोग
सोमवती अमावस्या के दिन ही शनि जयंती होने से यह संयोग प्रभावशाली हो गया। जवाहर हाट स्थित शनिदेव मंदिर और रंगेश्वर मंदिर स्थित शनिदेव पर विशेष फूलबंगला सजाया गया। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ दर्शन किए। यह क्रम देर रात तक चला।