ब्रज की होली विश्व प्रसिद्ध है। होली के पर्व पर यहां सदियों पुरानी लीलाएं जीवंत हो जाती हैं। इनमें भक्त प्रहलाद की लीला भी शामिल हैं, जो हर वर्ष मथुरा के गांव फालैन में होती है।
भक्त प्रह्लाद लीला को साकार करने के लिए अग्नि की जलती लपटों से निकलने की परंपरा को जीवित रखने वाले गांव फालैन के ग्रामीण होली मेले की तैयारियां करने में जुटे हैं। वहीं होलिका के दहकते अंगारों के बीच गुजरने के लिए आस्था की 'अग्नि परीक्षा' देने के लिए संजू पंडा तैयार हैं।
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गांव फालैन को प्रह्लादनगरी के नाम से जाना जाता है। एक माह की कठिन तपस्या के बाद 14 मार्च को तड़के होलिका दहन के दिन करीब 4 बजे होलिका दहन के दिन संजू पंडा मंदिर की ज्योति पर हाथ रख शुभ लग्न के संकेत मिलने का इंतजार करेंगे। जैसे ही दीपक की लौ से शीतलता का आभास होगा, उनके इशारे पर होलिका में अग्नि प्रवेश करा दी जाएगी। इसके बाद प्रह्लाद कुंड में स्नान कर वे होलिका के दहकते अंगारों के बीच से गुजरेंगे। इस दौरान पूरा गांव भक्त प्रह्लाद के जयघोषों से गुंजायमान हो उठेगा। संजू पहली बार इस रस्म को निभाएंगे।
पैगांव के हुरियारे पहुंचेंगे फालैन
फालैन के पंडा मेले में पैगांव के हुरियारों की करीब छह टोलियां गांव पहुंचेंगी, जहां ढोल-नगाड़ों के मध्य गांव की गली-गली में चौपाइयों का गायन कर रंग-गुलाल की बरसात कर आसमान को इंद्रधनुषी रंग में रंग देंगे। मेले में कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण भी हिस्सा लेंगे।
आपसी सहमति से होता है नाम तय
एक बार नाम तय होने के बाद वसंत पंचमी के बाद आने वाली पूर्णिमा को चयनित किए पंडा को एक माला दी जाती है। इस माला को लेकर चयनित किया गया पंडा उसी माला को लेकर गांव में स्थित प्रह्लाद मंदिर पर माला लेकर भजन पूजा के लिए बैठ जाते हैं। यह भजन पूजा होली तक चलती है। इस बार धधकती आग से निकलने की प्रथा को संजू पंडा पहली बार निभाएंगे।
व्रत के दौरान पालन के हैं नियम
गांव के लोगों के अनुसार, संजू पंडा माघ पूर्णिमा से तप पर प्रह्लाद मंदिर में बैठ गए। संजू एक माह से मंदिर में अखंड ज्योति के पास बैठकर तप कर रहे हैं। इस बीच जमीन पर ही सो रहे हैं। इस दौरान वे केवल फलाहार ही कर रहे हैं और घर भी नहीं गए है।
30 फीट व्यास की अग्नि से निकलते हैं पंडा
होलिका दहन के दिन संजू पंडा का व्रत पूरा होगा। उस दिन मुहूर्त के अनुसार प्रह्लाद कुंड के समीप विशालकाय होलिका बनाई जाएगी। यह करीब 30 फीट व्यास से ज्यादा की होगी। मुहूर्त के अनुसार पंडा प्रह्लाद जी के मंदिर से निकलेंगे और फिर प्रह्लाद कुंड में स्नान कर सीधे जलती होली की लपटों के बीच से नंगे पैर जाएंगे।