मथुरा। होली पर पकवानों की मिठास तो सभी को खूब पसंद आती है, लेकिन मिलावट इसमें कड़वाहट घोल सकती है। होली पर बढ़ती मांग को देखते हुए मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। मावा और पनीर के साथ तेलों में भी मिलावट का खेल शुरू हो गया, लेकिन सावधानी आपको इस मिलावट से बचा सकती है। छोटी-छाेटी बातों का ध्यान रखकर हम मिलावट की पहचान कर सकते हैं।
बिना गुजिया के होली की मिठास पूरी नहीं हो सकती है और बिना मावा के गुजिया बनाना भी संभव नहीं है। गुजिया की मांग बढ़ने के साथ ही मावा की मांग भी बढ़ जाती है और इसके साथ ही शुरू हो जाती मिलावट, लेकिन थोड़ी सतर्कता बरती जाए तो मावा में मिलावट की पहचान की जा सकती है।
सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कुछ घरेलू विधियों से भी मावा की शुद्धता जांची जा सकती है। शुद्ध मावा तैलीय और दानेदार होता है। खाने में उसका स्वाद हल्का मीठा होता है। थोड़ा सा मावा लेकर हथेली पर रगड़ा जाए तो हथेली पर चिकनाई के निशान रह जाते हैं। इसके अलावा घर पर मावा की जांच के लिए तवा पर थोड़ा मावा लेकर उसमें एक बड़ा चम्मच चीनी डालें। गर्म करने के साथ चीनी पिघलने पर अगर किनारों पर पानी छोड़ना शुरू हो जाता है, मावा मिलावटी है।
मावा ही नहीं पनीर भी इन दिनों में बाजार में मिलावटी मिल रहा है। हाल ही एफएसडीए की टीम भी कई जगह मिलावटी पनीर बनाने के मामले उजागर कर चुकी है। ऐसे में पनीर खरीदते समय भी बेहद ध्यान देने की जरूरत है। पनीर को हाथ में लेकर मसलने पर अगर बिखरने लगे तो ये तय है कि उसमें मिलावट है। दरअसल स्किम्ड मिल्क पाउडर से बना पनीर बिखर जाता है, जबकि असली पनीर नहीं बिखरता है। साथ ही असली पनीर काफी मुलायम होता है।
निर्माण तिथि का जरूर रखें ध्यान
पैक्ड मिठाइयाें से लेकर नमकीन व अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते समय उस पर दर्ज निर्माण तिथि जरूर देखें। साथ ही ये भी देखें कि संबंधित खाद्य पदार्थ कब तक खाने के योग्य है। खुली गुजिया और मिठाइयां खरीदते समय भी इसका ध्यान रखें। विक्रेता से निर्माण की तारीख के बारे में जानकारी लेने के बाद ही खरीदारी करें।
लोगों की बात
एफएसडीए की टीम को मावा व अन्य दूध संबंधी खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए अभियान चलाना चाहिए। बस कुछ ही दुकानों से लिए गए नमूनों से मिलावट रुकना मुश्किल होता है। साथ ही लोगों को भी मिलावट की पहचान के लिए जागरूक करना चाहिए।
-ब्रजेश रावत, लक्ष्मीनगर।
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आम आदमी के लिए मावा हो या पनीर उसमें मिलावट की पहचान करना मुश्किल होता है। अगर उन्हें ये बताया जाए कि कैसे इसकी जांच की जा सकती है, तो काफी हद तक मिलावट से बचा जा सकता है। लेकिन लोगों तक इसकी जानकारी ही नहीं पहुंच पाती है।
-निशांत गुप्ता, लोहवन