वृंदावन। वृंदावन में 500 साल पुराने पुरातात्विक महत्व के मदनमोहन मंदिर के आसपास हो रहे अवैध निर्माणों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तल्ख रवैया अपनाया है। सुनवाई के दौरान एएसआई एवं मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण को तलब कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल एवं पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता प्रहलादकृष्ण शुक्ला की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मंदिर के आसपास निर्माण पर रोक है तो निर्माण की अनुमति कैसे दे दी गई और अवैध निर्माण को ध्वस्त क्यों नहीं किया गया।
याची के अधिवक्ता महेश शर्मा ने कोर्ट को बताया कि पुरातात्विक महत्व के मदनमोहन मंदिर के निषिद्ध एवं विनियमित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहे हैं। मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराने द्वादश आदित्य टीले पर स्थापित है। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1580 में व्यवसायी रामदास कपूर ने कराया था और उससे पूर्व 1534 में सनातन गोस्वामी ने यह भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह श्रीमदनमोहन जी को स्थापित किया था। मंदिर की देखरेख का जिम्मा पुरातत्व विभाग के पास हैं।
प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और (संशोधन एवं विधिमान्यकरण) विधेयक, 2010 के अंतर्गत किसी भी ऐतिहासिक भवन के 200 मीटर के दायरे में कोई नया या पुराना निर्माण नहीं किया जा सकता हैं लेकिन मथुरा-वृंदावन में संरक्षित स्मारकों के आसपास 1180 अवैध निर्माण किए जा चुके हैं। कोर्ट ने प्राधिकरण एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से पूछा है कि रोक के बाद कैसे व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दी गई है। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट शीघ्र ही तिथि तय करेगी।