वृंदावन (मथुरा)। स्थापत्य कला के शौर्य के दर्शन कराने वाली हेरिटेज इमारतें कहीं छुप सी गईं हैं। कभी कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने वाली यह इमारतें आज अवैध निर्माण की परछाईं में कहीं ओझल हो गईं हैं। आज हालात ऐसे हैं कि यह इमारतें अपने आने वाले कल के लिए जद्दोजहद कर रहीं हैं।
स्थापत्य कला की अद्भुत छटा बिखेर रहे लाल पत्थर से निर्मित मंदिरों की वास्तुकला से लेकर पत्थरों की अद्भुत नक्काशी एवं शिल्पकला पूरी दुनिया को अपनी आकर्षित कर रही है। वहीं पत्थरों पर कारीगरों द्वारा की गई नक्काशी आज भी इन धरोहरों के जीवंतता के शौर्य का दर्शन कराती है। देश की हेरिटेज इमारतों में शामिल वृंदावन के इन धरोहर लगातार दुर्दशा हो रही है।
राष्ट्रीय स्मारक के रूप में संरक्षित इन मंदिरों की वास्तविक सुध लेने की जरूरत कभी किसी केेंद्र एवं राज्य सरकार ने नहीं उठाई। लाल पत्थर से बने यह उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं एवं देखरेख के अभाव में लाल पत्थर से निर्मित यह भवन काले पड़ते जा रहे हैं। शाम ढलते ही दिव्य एवं भव्य स्मारक अंधेरे में खो जाते हैं, इनके चारों तरफ अंधेरा छा जाता हैं। इन धरोहरों के आसपास लगातार गंदगी भी बनी रहती है।
प्राचीन धरोहरों की हो रही दुर्दशा से आने वाले देशी-विदेशी श्रद्धालुओं की आस्था को लगातार ठेस पहुंच रही है। हेरिटेज इमारतों के संरक्षित क्षेत्रों को भी बचाया नहीं जा सका है, इनके निषिद्ध एवं विनियमित क्षेत्रों पर प्रशासनिक अफसरों की मिलीभगत के चलते बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किए जा चुके हैं एवं अधिकारियों की अनदेखी के चलते वर्तमान में भी लगातार अवैध निर्माण हो रहे हैं। (संवाद)
हाईकोर्ट भी है नाराज
हाल में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा याचिकाकर्ता प्रहलादकृष्ण शुक्ला की जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए वृंदावन के मदनमोहन मंदिर के आसपास हो रहे अवैध निर्माणों पर तल्ख दिखाते हुए पुरातत्व सर्वेक्षण एवं मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण को तलब किया है। प्राचीन धरोहर के आसपास निर्माण की अनुमति कैसे दे दी गई एवं इन्हें ध्वस्त क्यों नहीं किया गया है, इस पर जवाब भी मांगा है।
कुल ४३ धरोहरें हैं
विश्व विरासत की बात करें तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित ४३ ऐतिहासिक धरोहर हैं, जिनमें मुख्य रूप से वृंदावन के अति प्राचीन पांच मंदिर जैसे गोविंददेव मंदिर, मदन मोहन मंदिर, पुराना राधावल्लभ मंदिर, जुगल किशोर मंदिर, गोपीनाथ मंदिर के अलावा मथुरा में कंकाली टीला, अडींग का किला व गोसना का टीला आदि प्रमुख हैं।
एतिहासिक इमारतों को संरक्षित करने के लिए विभाग द्वारा उनके चारों ओर दीवार तैयार की गई हैं। जहां पर टूट-फूट होती है, उसे ठीक कराया जाता है। लगातार देखरेख की जा रही है। किसी भी तरह के अतिक्रमण की शिकायत मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है।
- राजकुमार पटेल, अधीक्षण पुरातत्व विद