सरकारी सस्ते गल्ले के डीलरों की बैसाखियों पर चल रहे जिला आपूर्ति विभाग ने राशन कार्ड बनाने और उसके सत्यापन की जिम्मेदारी भी डीलरों के हवाले कर दी है। जिले में राशन डीलर ही तय कर रहे हैं कि किसका राशन कार्ड किस श्रेणी में बनेगा और किसे राशन मिलेगा।
जिले की राशन वितरण प्रणाली को लेकर संचालित अमर उजाला हेल्पलाइन जिला आपूर्ति विभाग हो रही गड़बड़ी के रोजाना नए खुलासे कर रही है। यह शिकायत आम है कि राशन डीलर राशन नहीं देता है। माह में एक-दो दिन ही दुकान खुलती है। कोई तेल हड़प रहा है तो कोई राशन। अधिक मूल्य और कम राशन देने की शिकायत भी आम है।
अब हेल्पलाइन के जरिए यह बात भी सामने आई है कि गरीबों का राशन हड़पने वाले डीलरों को ही जिलापूर्ति विभाग ने राशन कार्ड के बनवाने और सत्यापन के लिए अधिकृत कर दिया है। अब डीलर ही लोगों को धमका रहे हैं कि शिकायत करने पर उनका नाम लिस्ट से कटवा दिया जाएगा।
हेल्पलाइन में यह शिकायत भी आ रही हैं कि नवीन कार्ड उनके बनने के बाद फिर नाम कटवा दिए गए हैं। इसमें राशन कार्ड फीडिंग का काम संभाले एजेंसी भी लोगों के नाम जोड़ने और हटाने के इस गोरखधंधे में शामिल हो गई हैं। मांट क्षेत्र में इस एजेंसी के लोग सत्यापन के नाम पर डीलर के साथ 50-50 रुपये वसूल रहे हैं।
मुख्यमंत्री तक पहुंचने लगीं शिकायतें
राशन डीलरों की शिकायत अब मुख्यमंत्री तक भी पहुंचने लगी हैं। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर डीलरों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि पिछले तीन साल से अनाज का एक दाना तक नहीं बांटा गया है। स्थानीय स्तर पर अफसरों से शिकायत करते-करते वे थक गए।
सोमवार को अमर उजाला की हेल्पलाइन पर 600 शिकायत पहुंची। कई लोग वह पत्र भी लेकर पहुंचे जो उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे हैं। इन पत्रों के माध्यम से राशन डीलर की शिकायत की गई है। शिकायत पत्र पर पूरे गांव वालों के नाम और हस्ताक्षर हैं। ग्रामीणों ने यहां तक कहा है कि अगर राशन डीलर पर कार्रवाई नहीं की गई तो वह चुनावों का बहिष्कार कर देंगे। शासन ने पांच मामलों में तो जांच के आदेश भी कर दिए हैं।
इधर सस्पेंड उधर बहाल हो रहीं दुकान
राशन की दुकानों को सस्पेंड और बहाल करने का भी बड़ा खेल चल रहा है। इधर दुकानों को सस्पेंड किया जाता है और हफ्ते भर में बहाल कर दिया जाता है। अमर उजाला हेल्पलाइन पर पहुंची शिकायतों में कहा गया है कि जब गांव वालों ने इकट्ठा होकर कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया था तो दुकान को सस्पेंड कर दिया गया लेकिन हफ्ते भर बाद फिर बहाल कर दिया।
अब राशन डीलर कहता घूमता है कि उसने दुकान बहाल करा ली है। जिन लोगों ने शिकायत की थी उन्हें गल्ला नहीं दिया जाएगा। ग्रामीण कभी डीएम के पास जा रहे हैं तो कभी एसडीएम के, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं हो रही है। गांव वालों का कहना है कि अब तो पूरा कोटा ही ब्लैक कर दिया जाता है। चीनी का वितरण तो कभी होता ही नहीं।