आख़िर समंदर का स्तर कितना ऊंचा उठ सकता है?
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शहरी क्षेत्र में स्थापित उद्योगों से हो रहे प्रदूषण पर अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में सुनवाई अब 25 मई को होगी। बुधवार को एनजीटी में केंद्र और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तो अपने जवाब दाखिल किए, लेकिन मुख्य सचिव और डीएम की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया।
दो माह पहले गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने एनजीटी में याचिका दाखिल की थी और कहा था कि मथुरा शहरी क्षेत्र में स्थित उद्योगों से प्रदूषण फैल रहा है। यमुना में भी खतरनाक रसायन जा रहे हैं। इस पर एनजीटी ने केंद्रीय व राज्य प्रदूषण बोर्ड के साथ मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार और डीएम मथुरा से जवाब मांगा था। बुधवार को केंद्रीय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी अपना पक्ष रखा।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि यह प्रकरण इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है। इसको देखते हुए एनजीटी में दायर याचिका को खारिज किया जाना चाहिए। इस पर याची के अधिवक्ता राहुल कुमार ने दलील दी कि कोर्ट में लंबित प्रकरण के आधार पर प्रदूषण फैलाने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती है।
मथुरा में यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की सहभागिता से शहर और यमुना में प्रदूषण फैलाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के साफ आदेश हैं कि शहरी आवासीय क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का संचालन नहीं किया जा सकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी याची के अधिवक्ता की दलील पर सहमति जताते हुए शहर में स्थापित प्रदूषणकारी उद्योगों के संचालन पर आपत्ति जताई। एनजीटी ने अब इस मामले पर फाइनल सुनवाई के लिए 25 मई की तिथि निर्धारित कर दी है।