होली की मस्ती में लोगों ने केमिकल युक्त रंगों का काफी प्रयोग किया। रंग आंखों में पहुंचा तो आंख लाल होने के साथ जलन शुरू हो गई। जिला अस्पताल की ओपीडी सोमवार को खुली तो मरीजों की लंबी लाइन लग गई। अस्पताल में सबसे ज्यादा संख्या आंख और त्वचा से संबंधित मरीजों की थी।
जिला अस्पताल की ओपीडी के पंजीकरण काउंटर पर सुबह 07:30 बजे से ही लाइन लग गई। मरीज व उनके परिजन चिकित्सक को दिखाने के लिए लाइन में लगे थे। सबसे ज्यादा नेत्र विभाग और त्वचा रोग के साथ फिजिशियन कक्ष के बाहर मरीजों की लाइन थी। सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक 1650 लोगों ने पर्चा बनाकर चिकित्सकों से परामर्श लिया। अस्पताल की नेत्र ओपीडी में 110 मरीजों ने चिकित्सक को दिखाया। इसमें 70 प्रतिशत लोग होली खेलने में आंख में गए रंग से पीड़ित थे।
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. पीके गौतम ने बताया कि केमिकल के रंग से आंखों में जलन होने के बाद यह लाल हो जाती हैं। होली पर केमिकल वाले रंगों के प्रयोग से आंखों के लिए समस्या उत्पन्न हो गई। मरीज जतिन और सुरजीत ने बताया कि होली खेलते समय दोस्तों ने गुलाल मुंह पर फेंका, जो आंखों में चला गया। आंखों को साफ पानी से धोया, लेकिन लाल पड़ने और जलन पर आज अस्पताल पहुंचे हैं। ऐसी ही समस्या से पीड़ित काफी संख्या में मरीज पहुंचे थे।
नेत्र सर्जन डॉ. धीरेंद्र ने बताया कि ओपीडी में सामान्य मरीजों से अधिक लोग होली खेलने के दौरान रंग आंखों में पहुंच जाने की समस्या लेकर आए। सभी को परामर्श आदि दिया गया है। त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास पारूल, आयुषी, पूनम आदि चेहरे पर जलन की समस्या होने पर परामर्श लेने पहुंचीं। चिकित्सकों ने बताया कि केमिकल युक्त रंग के प्रयोग से त्वचा पर एलर्जी और जलन की समस्या लेकर काफी मरीज आए। सभी को गुनगुने पानी के साथ केमिकल रंगों से बचाव की सलाह दी गई।