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मथुरा: फर्जी आईपीएस मुठभेड़ में गिरफ्तार, सेना में नौकरी लगवाने का चलाता था सिंडिकेट; तीन साथियों का किया कत्ल

Thu, 26 Oct 2023 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

पुलिस रिकॉर्ड में फर्जी आईपीएस के खिलाफ 13 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से एक मुकदमा जम्मू कश्मीर के कुलगाम में धोखाधड़ी का भी है।
 
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मथुरा पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मथुरा में मगोर्रा पुलिस व एसओजी टीम द्वारा मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया फर्जी आईपीएस राधेश्याम उर्फ सुभाष कुंतल जरायपेशे में कई सालों से सक्रिय है। वह पहले सेना में भर्ती कराने का सिंडिकेट भी संचालित करता था। इसी सिंडिकेट के तीन सदस्य जोकि अलवर के रहने वाले थे। उनकी भर्ती के नाम पर युवाओं से ऐंठे करोड़ रुपयों के लेनदेन में मथुरा के हाईवे थाना क्षेत्र में हत्या कर दी थी।
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एसपी देहात त्रिगुण बिसेन ने बताया कि अपराध से राधेश्याम से काफी संपत्ति एकत्रित कर ली थी। पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ 13 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से एक मुकदमा जम्मू कश्मीर के कुलगाम में धोखाधड़ी का भी है। इसके अलावा चार मुकदमे भरतपुर में दर्ज हैं। दो मुकदमे जयपुर में दर्ज हैं। पांच मुकदमे मथुरा के हाईवे और एक कोसीकलां थाने में दर्ज हैं।

राधेश्याम उर्फ सुभाष कुंतल ने पूछताछ में बताया कि उसने सबसे पहले सेना में भर्ती लगवाने के नाम पर युवाओं से रुपये ऐंठने का सिंडिकेट संचालित किया था। इसी सिंडिकेट के तीन हिस्सेदार मुकेश कुमार यादव, रामेंद्र यादव निवासीगण अलवर और अरविंद निवासी महेंद्रगढ़, हरियाणा को 2014 में करोड़ों रुपये के लेनदेन में हाईवे थाना क्षेत्र में बुलाकर मौत के घाट उतार दिया था और रुपये लेकर अपने साथी कुशवल निवासी गांधी पार्क अलीगढ़, शिव सिंह निवासी फरह, प्रताप सिंह निवासी क्वार्सी, अलीगढ़, लाखन निवासी बल्देव, पूरन निवासी भरतपुर, जितेंद्र निवासी भरतपुर, बब्बू निवासी पहासू, बुलंदशहर संग फरार हो गया था। गिरफ्तारी के बाद इस वारदात में चार साल जेल में निरुद्ध रहा था।
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समय के साथ बदलता रहा जरायम का तरीका
राधेश्याम उर्फ सुभाष कुंतल बेहद शातिर अपराधी है। उसने समय-समय पर अपने जरायम के तरीकों को बदला, जिससे की किसी एक विशेष अपराध प्रवृत्ति के लिए पहचान होने पर पुलिस उसे पकड़ न सके। पुलिस के अनुसार राधेश्याम ने सबसे पहले सेना भर्ती सिंडिकेट संचालित किया। इससे उसने सैकड़ों युवाओं से पैसे लिए। इस गैंग में दस से अधिक लोग शामिल थे। ठगी के बाद इसने 2014 में डकैती की वारदात को अपने ही साथियों को धोखा देकर उनकी हत्या के साथ अंजाम दिया। इसके बाद अब यह फर्जी आईपीएस बनकर पुलिस महकमे से जुड़े लोगों को धमकाने लगा था। मुकदमों में वांछित आरोपियों की जानकारी हासिल कर उनके परिवार वालों से संपर्क करता।

वहां से सौदा तय होने के बाद संबंधित जिलों के पुलिस अधिकारियों को फोन कर खुद को आईपीएस बताता और मुकदमों से नाम निकालने का दबाव बनाता। इस तरीके से उसने मैनपुरी, गुजरात में कई वारदातों को अंजाम देकर करोड़ों रुपये कमाए। उसके पास से पुलिस को 21 फर्जी आईपीएस विजिटिंग कार्ड, एक आईएएस विजिटिंग कार्ड, एक तमंचा, दो कारतूस, एक बाइक बरामद हुई है। आईएएस का विजिटिंग कार्ड देख पुलिस यह भी अंदाजा लगा रही है कि इसने शायद खुद को आईएएस बताकर भी कई लाभ कमाए हैं।

फरह इंस्पेक्टर को धमकाने के बाद आया रडार पर
राधेश्याम ने बीते सोमवार को फरह थाना इंस्पेक्टर सुरेश चंद को धमकाया था। दरअसल, फरह इंस्पेक्टर द्वारा पिछले दिनों निशांत किरण कर्णिक पुत्र स्वः किरण गणेश कर्णिक निवासी बड़ोदरा, गुजरात को उसके पांच साथियों सहित रिफाइनरी की पाइप लाइन में सेंधमारी कर तेल चोरी के आरोप में चोर जेल भेजा था। बीते सोमवार को फरह इंस्पेक्टर सुरेश चंद को एक नंबर से फोन आया।

फोन करने वाले ने खुद को आईजी क्राइम लखनऊ पद पर तैनात आईपीएस सुभाष कुंतल बताया और निशांत किरण कर्णिक की जानकारी देने को धमकाया। इंस्पेक्टर द्वारा छानबीन में सामने आया कि इस नाम का कोई भी आईपीएस लखनऊ में तैनात नहीं है। इस पर उसने अपने थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद राधेश्याम को पुलिस ने रडार पर लिया।

राधेश्याम ने अपनी कोठी को बना रखा है अभेद किला
52 वर्षीय अपराधी राधेश्याम को लेकर पुलिस ने बताया कि अजान गांव, भरतपुर में उसकी आलीशान कोठी है। परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं। एक बेटा सीआरपीएफ में था। उसने खुद को फांसी लगाकर जान दे दी थी। गांव में उसने, जो आलीशान कोठी बना रखी है, उसको अभेद किला बना रखा है। चारों ओर तारों की बाड़बंदी करा रखी है। इसके अलावा चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी लगा रखे है। समय-समय पर खुद उनकी निगरानी करता है। इसके अलावा कोठी के आसपास हमेशा अपने कुछ लोगों को तैनात रखता है। गांव में चर्चा है कि राधेश्याम की कोठी की दीवारों में नोटों की गड्डी चिनी हुई हैं।
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