वृंदावन। श्री श्याम सेवाश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में बृहस्पतिवार को गुरु महिमा का वर्णन किया गया। कथाव्यास शीघ्रता त्रिपाठी ने प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरि होता है। बिना गुरु के किसी भी साधना या पुण्य का फल प्राप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि एक बार गुरु की कृपा हो जाए तो बिगड़ी तकदीर भी संवर जाती है।
कथावाचक शीघ्रता त्रिपाठी ने दान की महिमा बताते हुए कहा कि राजा बलि ने जब दान किया तो स्वयं भगवान विष्णु वामन रूप में उनके द्वारपाल बन गए। इसी से स्पष्ट होता है कि दान से बढ़कर कोई पुण्य नहीं। मनुष्य को अपने जीवन में सदा दान करते रहना चाहिए। कथा में भगवान वामन, राम और कृष्ण जन्म की कथाओं का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने जेल में जन्म लेकर नंदगांव में उत्सव मनवाया, जिससे यह संदेश मिलता है कि सच्चा आनंद सद्गुणों के साथ ही संभव है। संवाद