मंगलवार की रात कड़ाके की ठंड के साथ गिरे पाले से आलू और सरसों की फसल मुरझाने लगी है। किसानों का कहना है कि इससे बड़ा नुकसान होगा। अचानक बदले मौसम और फसलों पर जमे पाले से सबसे अधिक नुकसान आलू और सरसों की फसल को बताया जा रहा है।
बलदेव, राया, फरह के किसान 18,000 हेक्टेयर इलाके में आलू करते हैं। अन्य ब्लाकों में गेहूं के साथ सरसों की जाती है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डा यतेंद्र सिंह ने बताया कि ज्यादातर किसानों की फसल 60 से 70 दिन की हो चुकी है।
पाले से आलू और सरसों को बचाने के लिए किसान फसलों की सिंचाई करें। साथ ही आधा किलो सल्फर 80 प्रतिशत को 400 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टेयर में स्प्रे करें। इसके अलावा किसान आलू को फुलाने और मोटा करने के प्रयास में जाइम आदि न दें। इससे आलू फट सकता है।
पाले से नहीं मिलता पौधे को भोजन
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि पाला गिरने से पौधे के तने व पत्ते की कोशिकाआें के छिद्र रुक जाते हैं और पौधे को भोजन मिलने की प्रक्रिया रुक जाती है। इससे पौधा मर जाता है।