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देवगुरु बृहस्पति हुए अस्त, नहीं होंगे मांगलिक कार्य

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मथुरा। शनिदेव अस्त हो चुके हैं, शनि मकर राशि में गोचर कर रहे हैं, शनि के बाद रविवार को देव गुरु बृहस्पति भी अस्त होने के बाद शादी विवाह के लिए उत्तम समय नहीं है।
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ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब बृहस्पति और शुक्र ग्रह अस्त हो जाते हैं तो शादी विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। मान्यता है कि बृहस्पति और शुक्र ग्रह के अस्त होने के बाद यदि कोई शादी विवाह करता है तो उसमें कोई न कोई बाधाएं बनी रहती हैं। इसीलिए इस दौरान शादी विवाह जैसे आयोजन नहीं किए जाते हैं। प्रेम और दांपत्य जीवन के लिए शुक्र को एक प्रमुख कारक ग्रह माना गया है, शुक्र भी 16 फरवरी के बाद अस्त हो रहे हैं। इसलिए शादी विवाह के कार्यक्रम अब बृहस्पति और शुक्र के उदय होने के बाद ही संपन्न करने चाहिए।
राशियों पर प्रभाव
बृहस्पति और शुक्र के अस्त होने से मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या समेत सभी राशियों पर प्रभाव पड़ेगा। इस दौरान धन संबंधी मामलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। संवत 2077 पौष शुक्ल पंचमी 18 जनवरी से माघ शुक्ल प्रतिपदा 12-13 फरवरी तक गुरु अस्त रहेंगे। इस कारण विवाह, मुंडन आदि शुभ कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा, लेकिन अत्यावश्यक कार्यों को करने की अनुमति शास्त्र देते हैं। उसके लिए गुरु की विशेष शांति पूजा करके कार्य किए जा सकते हैं। अस्त होने की अवधि में ग्रह स्वयं भी पीड़ा भोगता है। इसलिए बृहस्पति की शुभता के लिए, शांति के लिए बृहस्पति के मंत्र ॐ ग्राम ग्रीम गुरुवे नम: मंत्र का नित्य एक माला जाप करना चाहिए। बृहस्पति के निमित्त पीला अनाज, पीले वस्त्र, घी, पीले फल, धार्मिक पुस्तकें, शहद आदि का दान करना चाहिए।
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