बिना दस्तखत और तारीख के आदेश जारी करने के एक मामले में दोषी साबित हुए तहसीलदार को राजस्व परिषद ने पदोन्नति दे दी। वह वर्तमान में कानपुर देहात में बतौर उप जिला अधिकारी तैनात हैं। जनसूचना अधिकार अधिनियम में इस बात का खुलासा हुआ है। पीड़ित ने एक बार फिर राज्यपाल का दरवाजा खटखटाया है।
आरटीआई कार्यकर्ताओं की संस्था ‘परिवर्तन’ से जुड़े शिकायतकर्ता रामगोपाल ने शिकायत की थी कि 30 मार्च, 2006 को तत्कालीन तहसीलदार राजीव पांडेय ने बिना तिथि और हस्ताक्षर के एक आदेश जारी किया। जिसके आधार पर लेखपाल चंद्रवीर ने अमल दरामद की कार्रवाई की। मामले में दो उपजिला अधिकारी और एक अपर जिला अधिकारी स्तर की जांच हुई। एडीएम की जांच में भी तत्कालीन तहसीलदार राजीव पांडेय दोषी पाए गए।
रामगोपाल ने जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत राजस्व परिषद से उनकी तैनाती और पदोन्नति के बारे में सवाल पूछे। जवाब में राजस्व परिषद के प्रभारी अधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने बताया कि डीएम का आरोप पत्र 4 फरवरी, 2014 को प्राप्त हुआ जबकि पदोन्नति प्रक्रिया 15 नवंबर, 2013 को ही पूरी हो गई थी। ऐसे में उक्त आरोप पत्र को नियुक्ति विभाग को प्रेषित किए जाने की जानकारी दी गई है।
आरटीआई कार्यकर्ता रामगोपाल का कहना है कि राजस्व विभाग गुमराह कर रहा है। इस मामले में वे अप्रैल, 2013 में ही मुख्यमंत्री कार्यालय को सभी दस्तावेजों सहित शिकायत दर्ज करा चुके थे। इस शिकायत के संदर्भ में तत्कालीन डीएम समीर वर्मा ने 8 अप्रैल, 2013 को अपना आरोप पत्र राजस्व परिषद को प्रेषित किया था। वो इस मामले में एक बार फिर राज्यपाल का दरवाजा खटखटाएंगे।