मिलावटी तेल के इस काले कारोबार में असरदार लोग शामिल हैं। मंत्री, विधायकों के साथ ही बड़े-बड़े नेताओं के सगे संबंधी पेट्रोल पंप चला रहे हैं। यही वजह है कि मशीनरी यहां होने वाले गोलमाल के बारे में जानकर भी अनजान बनी रहती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि नेताओं के पंपों पर मिलावट का धंधा फलफूल रहा है।
प्रदेश में पेट्रोल और डीजल में मिलावट के मामले कई दफा सामने आ चुके हैं। शासन तक रिपोर्ट पहुंच चुकी है। शासन को सूचना मिली थी कि प्रदेश में हरियाणा और दिल्ली से बड़े पैमाने पर डीजल लाया जा रहा है। जिससे प्रदेश के राजस्व को क्षति हो रही है। तस्करी के डीजल के टैंकर के टैंकर पेट्रोल पंपों पर पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा मामले दिल्ली और हरियाणा राज्यों के आसपास वाले जनपदों के थे। जिनमें मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, बुलंदशहर, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, मैनपुरी, फीरोजाबाद और हाथरस हैं। शासन ने मेरठ क्षेत्र की जांच तत्कालीन उपायुक्त खाद्य डीसी मिश्रा को सौंपी थी।
डीसी मिश्रा ने प्रमुख सचिव खाद्य को जो रिपोर्ट दी थी उसमें कहा गया था कि हरियाणा से डीजल लाकर उसमें केरोसिन मिलाया जा रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में कहा था कि कई बड़े सियासी लोग इस काले कारोबार में शामिल हैं। इनमें कई ऐसे पंपों का चिन्हीकरण किया गया था जो मंत्री और विधायकों के परिवार पर थे। यह पेट्रोल पंप वाले राशन के दुकानदारों से केरोसिन खरीदकर उसे डीजल में मिला रहे हैं।
पेट्रोल में साल्वेंट मिला दिया जाता है। वर्ष 2013 में व्यापार कर और पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा से भी जांच कराई गई थी। यहां जांच पूर्वांचल के जनपदों की थी। सप्लाई विभाग के अधिकारियों की भी एक टॉस्क फोर्स बनाकर पंपों की जांच कराई थी। उस वक्त भी कई पंपों पर अनियमितताएं मिली थीं।
मथुरा में 8 से ज्यादा पंप नेताओं के पास
ब्रज क्षेत्र के कई नेताओं पर पेट्रोल पंप है। मथुरा में ही जनप्रतिनिधियों और उनके परिजनों पर पेट्रोल पंप हैं। ऐसे पंपों की संख्या ही आठ से ज्यादा बताई जा रही है। इनमें कुछ पंप मौजूदा जनप्रतिनिधियों के हाथ में हैं जबकि कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों के हैं। खास बात यह है कि इन पंपों की चेकिंग ही नहीं होती है। अगर कभी सप्लाई विभाग के अधिकारी जाते भी हैं तो केवल औपचारिकता निभाई जाती है।