दूर दराज से पहुंचे भक्त द्वारिकाधीश की एक झलक पाने के साथ होली खेलने को ललायित दिखाई दिए। सुबह की आरती के बाद जब मंदिर की चौखट से सेवायतों ने स्वर्ण पिचकारी से रंगों की बौछार करनी शुरू की तो भक्त ठाकुरजी के रंगों से खुद को सराबोर होने से रोक ना सके। हर कोई चाहता था की ठाकुर जी की स्वर्ण रजत पिचकारी से उनके ऊपर रंग डाला जाए।
टेसू के फूलों के बाद जब ठाकुरजी का गुलाल उड़ना शुरू हुआ तो पूरा मंदिर परिसर ठाकुरजी की भक्ति में रंगमय हो गया। श्रीराधे, जय गोपाल के उद्घघोषों के साथ महिलाएं नृत्य करती हुई नजर आई। मंदिर के गोस्वामी डॉ. वागिश महाराज ने बताया कि आगामी त्रियोदशी को भी ठाकुरजी बगीचा में विराजमान होकर भक्तों के साथ होली खेलेंगे।