मथुरा। दादा-दादी जहां रहते थे। पापा हमारे जहां खेलते थे, सनातन सभ्यता जहां से निकली और पनपी। वह सिंध हमारा लौटा दो। भारत-पाकिस्तान गतिरोध के बाद सिंधी समाज ने सिंध वापस लौटेन की मांग की है।
विभाजन का दंश झेल चुके सिंधी समाज के लेखक व विचारक किशोर इसरानी ने कहा कि सिंधी समाज ने अपने ही देश में शरणार्थी होने का दंश झेला था। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि सिंध भारत की प्राचीन सभ्यता का सबूत है। यह स्वतंत्रता के बदले विभाजन की भेंट चढ़ गया था। इसके बाद सिंधी समाज के लोग अपने ही देश में बेगाने हो गए। इनका जन्म अखंडभारत के सिंध में हुआ।
उन्होंने कहा कि बहुत दुख होता है जब अपने बड़ों से उनके उजड़ने की कहानी सुनते हैं। अब तो हम भारत सरकार से यही मांग करते हैं कि कश्मीर के साथ ही हमारा सिंध हमको लौटा दो। वहीं सिंधी जनरल पंचायत के अध्यक्ष नारायण दास लखवानी ने ऑपरेशन सिंदूर में देश के जवानों के शौर्य को सलाम किया। लाड़ी लोहाणा सिंधी पंचायत के प्रदेश महासचिव रामचंद्र खत्री ने भी विचार रखे।