छाता। छाता शुगर मिल चालू करने की मांग को लेकर भूतपूर्व सैनिकों व किसानों के धरने में मंगलवार देर शाम बड़ा मोड़ आ गया। आंदोलनकारियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराने वाले गिर्राज वाल्मीकि (कोसीकलां) ने खुद धरना स्थल पहुंचकर अपनी रिपोर्ट वापस लेने का ऐलान किया और हाथ जोड़कर किसानों से माफी मांगी।
भावुक होकर गिर्राज वाल्मीकि ने कहा, ‘मुकदमा दर्ज कराने के बाद मेरी अंतरात्मा गवाही नहीं दे रही थी। ऐसा लगा जैसे मुझसे बड़ा अपराध हो गया है और दिन-रात चैन छीन गया था।’ उन्होंने दावा किया कि मुकदमा के बाद उनके पास फोन आ रहे थे, जो इस कदम को गलत बता रहे थे। धरना स्थल से उन्होंने कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण पर निशाना साधा। सामाजिक कार्यकर्ता नरदेव चौधरी से अपील की कि वे जनता के बीच आकर इस आंदोलन से जुड़ें। किसानों और मजदूरों ने उनका स्वागत किया। एफआईआर वापस होने और इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद धरना दे रहे किसानों का हौसला और बढ़ गया है।
वही, अंतरराष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता स्वामी सच्चिदानंद ने जातिगत भेदभाव और राजनीतिक बयानों पर तीखा हमला बोला है। आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने समाज में फैली जातिवादी मानसिकता पर गहरा प्रहार किया। उन्होंने याद दिलाया कि भगवान राम ने स्वयं महर्षि वाल्मीकि के चरण स्पर्श कर उनका सम्मान किया था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भगवान राम ने माता सीता को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में ही आश्रय दिलाया था, जहां लव और कुश का जन्म हुआ और उनकी शिक्षा-दीक्षा संपन्न हुई। ऐसे में जाति के आधार पर ऊंच-नीच का भाव रखना मर्यादा पुरुषोत्तम के विचारों के विपरीत है।
इसके साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चर्चित बयान बटेंगे तो कटेंगे पर तंज कसते हुए सामाजिक एकजुटता और सौहार्द का संदेश दिया। इस दौरान कर्मयोगी ललित कुमार, जबर सिंह प्रधान, पंकज आर्य, किशन सिंह आर्य, महिपाल आर्य, भावना, वीरी सिंह समेत अन्य किसान मौजूद थे।