मडौरा की पंचायत ने बेटियों के घर से बाहर मोबाइल से बात करने पर लगाए गए प्रतिबंध पर महिलाओं ने गहरी नाराजगी जताई है। तुगलकी फरमान देने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि कभी मोबाइल पर प्रतिबंध, कहीं पहनावे पर एतराज। खुद को समाज का ठेकेदार बताने वाले इन लोगों ने महिलाओं को समझ क्या रखा है।
मथुरा नगरपालिका की चेयरमैन मनीषा गुप्ता का कहना है कि आज के समय में यह फरमान बेहद घटिया है। यदि बहू बेटी घर से बाहर जा रही है तो वह परिवार वालों से संपर्क कैसे करेगी। जो लड़कियां पढ़ाई कर रही हैं वह कोई दिक्कत होने पर घर वालों को कैसे बताएंगी। इस तरह की बातें करने वालों पर ही कार्रवाई होनी चाहिए। भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष डा. दीपा अग्रवाल का कहना है कि आज पूरा देश नारी सशक्तीकरण की बात कर रहा है। बेटी बचाने और बेटी पढ़ाने की बात हो रही है और वहीं इस तरह की बातें बेहद गलत हैं।
समाजसेविका डा. लक्ष्मी गौतम ने कहा कि एक तरफ हम अंतरिक्ष का सफर करने वाली कल्पना चावला की बात करते हैं दूसरी तरफ पंचायतें ऐसे घटिया आदेश दे रही हैं, ये शर्मनाक है। लड़कियों को मोबाइल की जरूरत घर से बाहर अधिक पड़ती है। महिला काउंसलर व अधिवक्ता प्रतिभा शर्मा ने कहा ये आदेश महिलाओं और लड़कियों के संवैधानिक अधिकारों का सीधा हनन है। मोबाइल की घर में नहीं घर के बाहर जरूरत पड़ती है। पंचायत का आदेश तुगलगी फरमान जैसा है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
मोबाइल घर रखकर बाहर निकलीं लड़कियां
मथुरा। मडौरा गांव में पंचायत में लड़कियों के घर से बाहर मोबाइल पर बात करने पर ऐतराज जताने के तुगलकी फैसले के बाद बुधवार को लड़कियां अपने मोबाइल घर पर ही रखकर बाहर निकलीं। पंचायत में कहा गया था कि यदि कोई लड़की घर के बाहर मोबाइल पर बात करते हुए मिलेगी तो उससे 21000 रुपये का जुर्माना लिया जाएगा। पंचायत के निर्देश पर गठित कमेटी भी गांव में घूमकर निगहबानी करती नजर आई। देखा जा रहा था कि कहीं कोई लड़की मोबाइल पर बात तो नहीं कर रही है।