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Monkeys in Mathura: बंदरों के हमले के कारण छत से गिरी मां-बेटी, आठ महीने की मासूम की मौत

Tue, 04 Oct 2022 05:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

मथुरा में शहरों से धीरे-धीरे बंदर अब गांव की तरफ बढ़ रहे हैं। चौमुंहा ब्लॉक के गांव आझई खुर्द में बंदरों के हमले में आठ माह की मासूम की जान चली गई। उसकी मां भी घायल हुई है। 
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सड़क पर बैठे बंदर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मथुरा-वृंदावन में बंदरों का उत्पात किसी से छिपा नहीं है। आसपास के कस्बों में भी इस समस्या से लोग परेशान है। चौमुंहा ब्लॉक के गांव आझई खुर्द में बंदरों के हमले में एक महिला अपनी आठ महीने की बच्ची सहित छत से नीचे गिर गई। हादसे में बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि महिला घायल हो गई। उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

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गांव आझई खुर्द के विपिन सिंह की पत्नी पूजा रविवार को घर की छत पर आठ माह की बच्ची गुड़िया को लेकर बैठी थी। इसी दौरान बंदरों ने उस पर हमला बोल दिया। बंदरों से बचने के प्रयास में वह हड़बड़ाहट में छत से नीचे गिर गई। उसकी आठ माह की बच्ची की मौत हो गई। बता दें कि पिछले सप्ताह बरसाना में एक महिला घर के आंगन में लेटी थी। इसी दौरान बंदरों ने उन पर हमला कर दिया था। महिला की मौत हो गई थी।

शहरों से गांवों की तरफ बढ़ रहे बंदर

मथुरा-वृंदावन में करीब ढाई लाख बंदर बताए जाते हैं। इनके उत्पात के कारण लोग परेशान हैं। पुरानी और घनी आबादी में पुराने मकानों पर बंदरों की उछलकूद के कारण आए मकान गिर रहे हैं। शहरों से धीरे-धीरे बंदर अब गांव की तरफ बढ़ रहे हैं। बांकेबिहारी, द्वारिकाधीश समेत अन्य मंदिरों के आसपास बंदरों का जमघट श्रद्धालुओं के लिए मुसीबत बन रहा है। 

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कभी चश्मा तोड़ देते हैं तो कभी हाथ से खीने पानी की वस्तुएं छीन लेते हैं। पर्स भी छीन लेते हैं। हमला करके घायल कर देते हैं। पिछले साल होली गेट पर बंदर ने रुपयों से भरा बैग छीन उसमें सड़क पर फैला दिए थे। कुछ लोग रुपये लेकर फरार भी हो गए थे।

बंदरों को पकड़ने की नहीं मिलती है परमीशन

सबसे बड़ी दिक्कत यह भी हो रही है कि अब वन विभाग बंदरों को पकड़ने की अनुमति भी नहीं दे रहा है। चंबल समेत अन्य स्थानों पर बंदरों के खाने पानी की सुविधा न होने के कारण बंदर नहीं पकड़े जा रहे हैं। 

नगर आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि वन विभाग से अनुमति लेने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब तक मंकी सफारी नहीं बनेगी, समस्या का समाधान नहीं होगा। मंकी सफारी के लिए सांसद हेमा मालिनी संसद में भी अपनी बात कह चुकी हैं।
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