गीता शोध संस्थान में बैठक करते जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह।
मथुरा। प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने शुक्रवार को गीता शोध संस्थान में आयोजित बैठक में मथुरा-वृंदावन के घाटों के विस्तार, नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण के कार्यों की धीमी गति के लिए अधिकारियों की लापरवाही बताया। उन्होंने मंडलायुक्त को निर्देश दिए कि प्रमुख सचिव को अवगत कराकर सिंचाई विभाग के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
जलशक्ति मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में मथुरा-वृंदावन क्षेत्र की परियोजनाओं की समीक्षा की गई। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वृंदावन में केसी घाट से जुगल किशोर घाट तक यमुना के किनारे विभिन्न घाटों के निर्माण की परियोजना विभाग द्वारा तैयार की गई थी। परियोजना पर वर्ष 2019 में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण कार्य रुक गया था। 14 अगस्त 2024 को प्रतिबंध हटाए जाने के बाद भी, सिंचाई विभाग और यूपीपीसीएल के बीच वर्तमान दरों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। इस अनिर्णय के कारण परियोजना लगभग दो साल तक अधर में लटकी रही और पुनः जनवरी 2026 में ही इसका कार्य शुरू हो सका। रेटों के निर्धारण में देरी पर कैबिनेट मंत्री ने नाराजगी जताई।
वर्तमान में परियोजना के अंतर्गत केवल एक घाट पर ही कार्य प्रगति पर है। अप्रैल 2026 तक परियोजना की भौतिक प्रगति महज पांच फीसदी ही दर्ज की गई है। कैबिनेट मंत्री ने निर्देश दिए कि सभी साइटों पर अधिक श्रमिक और मशीनरी लगाकर बारिश शुरू होने से पहले कार्य को पूरा किया जाए। जिले में द्वारिकाधीश मंदिर के पास विश्राम घाट पर 700 रनिंग मीटर पुराने घाट की मरम्मत और 210 रनिंग मीटर नए घाट के निर्माण कार्य की भौतिक प्रगति केवल 10 प्रतिशत है। अक्रूर घाट परियोजना लागत की धनराशि से 317 लाख रुपये प्रथम किस्त के रूप में कार्यदायी संस्था/सिंचाई विभाग को अवमुक्त कर दिए गए हैं, लेकिन अभी तक निविदा प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है। मंत्री ने इस लापरवाही पर अफसरों को फटकार लगाई। मंडलायुक्त से कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव को पत्र लिखने के निर्देश दिए।
वृंदावन माइनर को अस्तित्व में लाने को बनेगी नई परियोजना
मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप सिंह ने अवगत कराया कि वृंदावन में कभी वृंदावन माइनर और हरगूलाल गूल नाम की नहरें हुआ करती थीं, जिनसे श्री बांकेबिहारी जी की बगीची व रंगजी की बगीची और अन्य कुंडों को जलापूर्ति होती थी। शहरीकरण के कारण इन चैनलों में पानी आना बंद हो गया था। ब्रज तीर्थ विकास परिषद, मथुरा द्वारा इन्हें पुन: अस्तित्व में लाने के लिए डीपीआर तैयार की गई, आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी। मंत्री ने सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए कि मथुरा-वृंदावन में इन पुरानी माइनरों और गूलों को पुनर्जीवित करने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण कर नई परियोजना तैयार की जाए, ताकि प्राचीन बगीचों और कुंडों में पूर्व की भांति जलापूर्ति सुनिश्चित हो सके।