समय से पूर्व बंद हुए बांकेबिहारी मंदिर के पट
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आस्था की स्थली के रूप में विश्वविख्यात ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर भी लैंगिक भेदभाव से अछूता नहीं है। मंदिर प्रबंध कमेटी के चुनाव में महिलाओं को मतदान का भी अधिकार नहीं दिया गया है। विशेष परिस्थितियों में ही महिलाओं को मतदाता सूची में शामिल किया जाता है। महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में हाईकोट के आदेश पर महिलाओं को पूजन की अनुमति मिलने के बाद यहां भी महिलाओं के अधिकारों के लिए सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
बता दें कि विश्व विख्यात ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की प्रबंध कमेटी के चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस चुनाव से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कमेटी के चुनावों में सेवायत गोस्वामी समाज के परिवार की महिलाएं चुनाव नहीं लड़ सकतीं। न ही उन्हें मतदान का अधिकार है। केवल ऐसी विधवा महिला को ही वोटिंग का अधिकार है जिसके परिवार का उत्तराधिकारी नाबालिग है।
इस बारे में पूछे जाने पर मंदिर के सेवायत प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि अब तक मंदिर कमेटी में कोई महिला सदस्य नहीं चुनी गई। सामान्य परिस्थिति में महिलाओं को मतदान का भी अधिकार नहीं हैं। यह बात कमेटी की नियमावली में उल्लेखित है। प्रबंध कमेटी चुनाव के सह निर्वाचन अधिकारी उमेश सारस्वत के अनुसार इस चुनावों के लिए जारी की गई मतदाता सूची में शामिल चार विधवा महिलाएं मतदान कर सकेंगी।
नमें से तीन को इस बार ही सूची में शामिल किया गया है, जबकि एक महिला पहले से ही सूची में शामिल है। ये चारों ही महिलाएं शयन भोग सेवाधिकारियों के परिवारों से संबद्ध हैं। ज्ञात हो कि मंदिर की सेवायत परंपरा को राजभोग और शयनभोग सेवाधिकारी नाम से जाना जाता है।
क्रवार को महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के पूजन करने पर लगी पाबंदी को बांबे हाईकोर्ट द्वारा हटाने का फैसला आने के बाद ठाकुर बांके बिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी में महिलाओं के अधिकारों के लिए सुगबुगाहट शुरू हो गई है।