आगरा-दिल्ली हाईवे के चौड़ीकरण में भी बड़ा घोटाला सामने आ रहा है। हाईवे किनारे की जो जमीन चौड़ीकरण के लिए ली गई उसकी श्रेणी में खेल करके अफसरों ने लाखों के वारे-न्यारे कर लिए हैं। कृषि भूमि को आबादी में दर्शा दिया जबकि आबादी को व्यावसायिक श्रेणी में शामिल करके कई बिल्डरों को लाभ पहुंचाया गया है। अब मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंची तो हल्ला मचा है।
आगरा से दिल्ली तक (नेशनल हाईवे-2) के 220 किलोमीटर हिस्से को सिक्सलेन किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर वर्ष 2014 में काम शुरू हुआ था। मथुरा जिले में ही 82 किलोमीटर हिस्से को सिक्सलेन बनाया जा रहा है। इसके लिए मथुरा में कोटवन से लेकर रैपुराजाट तक 42 गांव के किसानों की भूमि चौड़ीकरण के लिए खरीदी गई। प्रशासन ने 108 हेक्टेयर जमीन के लिए किसानों में 385 करोड़ का मुआवजा बांटा। हालांकि मुआवजे को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठ रहे थे लेकिन अब जब प्रदेश में सत्ता बदली तो घपले खुलकर सामने आने लगे हैं।
भूमि खरीद में अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए श्रेणी ही बदल दी गई। अगर सड़क किनारे की जमीन खेती में थी तो उसे आबादी में दर्ज कर दिया गया है। इस श्रेणी के बदलते ही मुआवजे में लाखों का अंतर आ गया। आबादी वाली जमीन को व्यावसायिक की श्रेणी में शामिल कर दिया गया है।
रातों-रात बदली गई 11 प्लाटों की श्रेणी
ग्यारह प्लाटों की श्रेणी भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद बदल दी गई थी। ये प्लाट पहले कृषि भूमि में थे लेकिन जब प्रशासन ने अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की तो बाद में इनकी श्रेणी बदल दी गई। इन प्लाट की श्रेणी का बदलाव भी जांच के घेरे में आ रहा है।
220 किलोमीटर है प्रोजेक्ट की लंबाई
2014 में हुई प्रोजेक्ट की शुरुआत
2000 करोड़ है प्रोजेक्ट की लागत
108 हेक्टेयर भूमि खरीदी गई है
42 गांव के किसानों की जमीन ली गई
यहां हुआ है खेल
मौजा गणेसरा, चौमुंहा, छटीकरा, टाउनशिप, बाद, फरह, छाता, कोसीकला और मथुरा शहरी क्षेत्र।
2016 में शुरू हुई जांच को दबा दिया था
वर्ष 2016 में इस प्रोजेक्ट की जांच शुरू कराई गई थी। सतर्कता अनुभाग के उप सचिव एसपी सिंह ने नौ मार्च, 2016 को पत्र जारी करके प्रशासन से इस प्रोजेक्ट के बारे में डिटेल मांगी थी। कहा गया था कि विजिलेंस जांच शुरू हो रही है लेकिन उसके बाद जांच ही दबा दी गई। इस पत्र के बाद कोई दूसरी चिट्ठी भी जारी नहीं की गई।
पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति पर भी था आरोप
हाईवे सिक्सलेन के लिए जमीन खरीद में हुए घोटाले की शिकायत पूर्व विधायक प्रणतपाल सिंह ने मुख्य सचिव से की थी। शिकायत में कहा था कि मथुरा के अधिकारियों को गायत्री प्रसाद प्रजापति का संरक्षण है। अधिकारी भी उनके करीबी हैं।